Aurangabad News : काराकाट सांसद एवं अखिल भारतीय किसान महासभा के राष्ट्रीय महासचिव राजाराम सिंह के नेतृत्व में प्रस्तावित इंद्रपुरी जलाशय निर्माण स्थल का भौगोलिक एवं जमीनी निरीक्षण किया गया. प्रतिनिधिमंडल ने आसपास के गांवों का दौरा कर ग्रामीणों और किसानों से मुलाकात की तथा उनकी समस्याओं की जानकारी ली. इस दौरान जलाशय निर्माण से जुड़ी स्थानीय परिस्थितियों और किसानों की जरूरतों को समझने का प्रयास किया गया.
दशकों से लंबित है इंद्रपुरी जलाशय परियोजना
सांसद राजाराम सिंह ने कहा कि लंबित इंद्रपुरी जलाशय परियोजना क्षेत्र के किसानों की लंबे समय से चली आ रही मांग है. वर्ष 1990 में बिहार के तत्कालीन मुख्यमंत्री ने इस परियोजना की नींव रखी थी. इसके बाद करीब 35 वर्ष बीत जाने के बावजूद परियोजना का निर्माण पूरा नहीं हो सका है. दशकों से परियोजना के लंबित रहने का सबसे बड़ा असर क्षेत्र के किसानों पर पड़ा है.
उन्होंने कहा कि सिंचाई की पर्याप्त और स्थायी व्यवस्था नहीं होने के कारण किसानों की खेती आज भी काफी हद तक बारिश पर निर्भर है. कदवन जलाशय का निर्माण पूरा होने से बड़ी संख्या में किसानों के खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंचाया जा सकता है. इससे कृषि उत्पादन बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी.
जलाशय से हजारों किसानों को मिलेगी राहत
सांसद ने कहा कि इंद्रपुरी जलाशय महज एक परियोजना नहीं है, बल्कि इलाके के हजारों किसानों की उम्मीद, उनकी खेती और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य से जुड़ा सवाल है. जलाशय के निर्माण के साथ सोन नहरों के आधुनिकीकरण की भी आवश्यकता है, ताकि सिंचाई व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाया जा सके.
निरीक्षण के दौरान भाकपा माले नेता एवं पूर्व विधायक महानंद सिंह, डॉ. अजीत कुशवाहा, नवीनगर विधानसभा क्षेत्र से महागठबंधन प्रत्याशी रह चुके आमोद चंद्रवंशी, किसान नेता विनोद सिंह, रामाधार सिंह, अशोक यादव, कृष्णा प्रसाद, सत्येंद्र मेहता, नागेंद्र मेहता, वीरेंद्र वर्मा, झारखंड के किसान नेता कालीचरण मेहता, त्रिलोकी कुमार समेत अन्य मौजूद थे.
मुख्यमंत्री ने बजट में प्रावधान का दिया आश्वासन
सांसद राजाराम सिंह ने बताया कि इंद्रपुरी जलाशय निर्माण और सोन नहरों के आधुनिकीकरण की मांग को लेकर प्रधानमंत्री को ज्ञापन दिया जा चुका है. कुछ दिन पहले मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से मुलाकात कर भी ज्ञापन सौंपा गया था. उनके अनुसार, मुख्यमंत्री की ओर से इस मामले में सकारात्मक आश्वासन मिला है और अगले बजट में परियोजना के लिए बजटीय प्रावधान करने की बात कही गयी है.
बिहार के लिए अपना डैम जरूरी बताया
सांसद ने मुख्यमंत्री का ध्यान वर्ष 1990 में इंद्रपुरी जलाशय के शिलान्यास के दौरान तत्कालीन मुख्यमंत्री द्वारा कही गयी बातों की ओर भी आकृष्ट कराया. सांसद के अनुसार, उस समय कहा गया था कि बिहार सोन के पानी का इस्तेमाल करने वाला पहला राज्य है. रिहंद और बाणसागर के निर्माण के बाद सोन नदी के पानी की उपलब्धता प्रभावित हुई है. ऐसे में बिहार के लिए अपने डैम की आवश्यकता है.