दक्षिणी बिहार में मॉनसून की रफ्तार धीमी पड़ने से किसानों की चिंता बढ़ गई है. प्रमुख खरीफ फसल धान की रोपाई का उपयुक्त समय धीरे-धीरे निकलता जा रहा है, लेकिन कई दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेत सूखे पड़े हैं. आहर, पोखर, नदी और नाले अब भी पानी के इंतजार में हैं. कई इलाकों में खेतों में धूल उड़ रही है, जिससे खेती का काम बुरी तरह प्रभावित हो रहा है.
धान की रोपनी और खरीफ फसलें हो रही प्रभावित
बारिश नहीं होने से जिले के दक्षिणी क्षेत्र में धान की रोपनी लगभग ठप पड़ गई है. जिन किसानों ने रोहिणी नक्षत्र में धान का बिचड़ा तैयार किया था, उनका बिचड़ा भी खराब होने लगा है. वहीं, संसाधन संपन्न किसान समर्सिबल मोटर के सहारे किसी तरह धान की रोपाई कर रहे हैं. तेज धूप और उमस के कारण जुताई किए गए खेत भी तेजी से सूख रहे हैं. खरीफ सब्जियों की फसल मुरझाने लगी है, जबकि मक्का की फसल पर कीटों का प्रकोप बढ़ गया है.
15 से 17 जुलाई के बीच बारिश की संभावना
मौसम वैज्ञानिक डॉ अनूप कुमार चौबे ने बताया कि अगले एक-दो दिनों तक उमस भरी गर्मी बनी रहेगी. हालांकि 15 से 17 जुलाई के बीच मेघगर्जन के साथ हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है. कुछ स्थानों पर भारी बारिश भी हो सकती है. उन्होंने बताया कि 18 जुलाई को मौसम फिर साफ रहने का अनुमान है. जलवायु परिवर्तन के कारण मौसम की अनिश्चितता बढ़ी है, इसलिए किसानों को बदलते मौसम को ध्यान में रखकर खेती करनी चाहिए.
औरंगाबाद में सामान्य से काफी कम हुई बारिश
अनुमंडल सांख्यिकी पदाधिकारी ब्रजेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि जुलाई महीने में जिले में 323.3 मिमी बारिश होनी चाहिए थी. 13 जुलाई तक सामान्य स्थिति में 140.1 मिमी वर्षा दर्ज होनी चाहिए थी, लेकिन अब तक केवल 67.8 मिमी बारिश हुई है. यह सामान्य से काफी कम है, जिसका सीधा असर खेती और जल स्रोतों पर पड़ रहा है.
बारिश का इंतजार कर रहे किसान
पर्याप्त वर्षा नहीं होने से किसान अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं. उनका कहना है कि समय पर बारिश नहीं होने से धान समेत अन्य खरीफ फसलों की खेती प्रभावित हो रही है. यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो उत्पादन पर भी इसका असर पड़ सकता है.
