मौके पर जुटी ग्रामीणों की भीड़

औरंगाबाद : मदनपुर में लावारिस शव दफनाने पहुंची पुलिस का ग्रामीणों ने किया विरोध, शव लेकर लौटना पड़ा

औरंगाबाद जिले में एक लावारिस शव को दफनाने के दौरान पुलिस को ग्रामीणों के भारी विरोध का सामना करना पड़ा. पहचान न होने पर प्रशासन ने शव के अंतिम संस्कार का निर्णय लिया था, लेकिन ग्रामीणों के कड़े विरोध के कारण पुलिस को शव वापस ले जाना पड़ा.

Aurangabad News : औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड के सलैया थाना क्षेत्र में एक लावारिस शव को दफनाने के दौरान सोमवार को पुलिस को ग्रामीणों के विरोध का सामना करना पड़ा. स्थिति ऐसी बनी कि पुलिस को शव वापस लेकर लौटना पड़ा. बाद में प्रशासन ने शव को चाल्हो पहाड़ के समीप दफनाकर अंतिम संस्कार कराया.

मदार नदी से बरामद अज्ञात शव की पहचान न होने पर लिया गया निर्णय

जानकारी के अनुसार, सलैया थाना पुलिस ने एक सितंबर को थाना क्षेत्र के मंचानी गांव के समीप मदार नदी से एक अज्ञात पुरुष का शव बरामद किया था.

शव को पोस्टमार्टम के बाद पहचान के लिए सदर अस्पताल के शवगृह में सुरक्षित रखा गया था. कई दिनों तक पहचान नहीं होने पर पुलिस ने नियमानुसार शव का अंतिम संस्कार कराने का निर्णय लिया.

बेरी खेल मैदान के पास शव दफनाने पहुंची पुलिस

सोमवार को पुलिस शव को लेकर थाना क्षेत्र के बेरी खेल मैदान के समीप नदी किनारे दफनाने पहुंची. इसकी जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए और शव दफनाने का विरोध शुरू कर दिया.

ग्रामीणों का कहना था कि उक्त स्थान पर पहले कभी किसी शव का अंतिम संस्कार या दफन नहीं किया गया है, इसलिए यहां लावारिस शव को भी दफनाने की अनुमति नहीं दी जाएगी.

मौके पर जुटी ग्रामीणों की भीड़ पास में खड़ा शव वाहन | Prabhat Khabar Network

थानाध्यक्ष के समझाने पर भी नहीं माने ग्रामीण, वापस लौटी पुलिस टीम

मौके पर मौजूद सलैया थानाध्यक्ष कन्हैया शर्मा ने ग्रामीणों को काफी समझाने का प्रयास किया, लेकिन ग्रामीण अपने निर्णय पर अड़े रहे. बढ़ते विरोध को देखते हुए पुलिस को शव वापस लेकर वहां से लौटना पड़ा.

प्रशासन ने चाल्हो पहाड़ के पास नियमानुसार कराया लावारिस शव का अंतिम संस्कार

बाद में प्रशासन ने वैकल्पिक स्थान का चयन करते हुए चाल्हो पहाड़ के समीप शव को दफनाकर अंतिम संस्कार की प्रक्रिया पूरी कराई. थानाध्यक्ष कन्हैया शर्मा ने बताया कि अज्ञात शव की पहचान नहीं हो सकी थी. ग्रामीणों के विरोध के कारण बेरी में दफन नहीं किया जा सका, जिसके बाद शव को चाल्हो पहाड़ के पास नियमानुसार दफना दिया गया.

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By विनय सिंह

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