Aurangabad News: औरंगाबाद जिले के मदनपुर प्रखंड के उत्क्रमित उच्च माध्यमिक विद्यालय खिरियावा में विषयवार शिक्षकों की भारी कमी के कारण छात्रों की पढ़ाई बुरी तरह प्रभावित हो रही है. स्थिति यह है कि मध्य विद्यालय के महज तीन कमरों में नवमी से लेकर बारहवीं तक कुल 585 छात्र-छात्राएं पढ़ने को मजबूर हैं. संसाधनों की कमी और शिक्षकों के अभाव के चलते विद्यालय की शैक्षणिक व्यवस्था चरमराती नजर आ रही है.
विद्यालय को वर्ष 2020 में माध्यमिक और 2023 में उच्च माध्यमिक की मान्यता मिली थी, लेकिन सुविधाओं और शिक्षकों की उपलब्धता में अपेक्षित सुधार अब तक नहीं हो सका है. वर्तमान में एक ही कमरे में स्मार्ट क्लास, पुस्तकालय और प्रयोगशाला का संचालन किया जा रहा है, जिससे पढ़ाई का माहौल प्रभावित हो रहा है. विद्यालय से मिली जानकारी के अनुसार माध्यमिक स्तर पर संस्कृत और गणित विषय के शिक्षक नहीं हैं.
वहीं उच्च माध्यमिक स्तर पर भौतिकी, रसायन और जीव विज्ञान जैसे महत्वपूर्ण विषयों के शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं. इंटर कला संकाय में भी स्थिति संतोषजनक नहीं है, जहां केवल इतिहास, राजनीतिक विज्ञान और उर्दू विषय के ही शिक्षक कार्यरत हैं. अन्य विषयों के लिए छात्रों को वैकल्पिक व्यवस्था का सहारा लेना पड़ रहा है.
छात्राओं ने जताई परेशानी
विद्यालय की छात्रा बेबी कुमारी ने बताया कि हमलोगों को कई विषयों की पढ़ाई नियमित रूप से नहीं हो पाती है. परीक्षा के समय काफी परेशानी होती है, क्योंकि कुछ विषयों के शिक्षक ही नहीं हैं.
छात्रा श्रुति कुमारी ने कहा कि “एक ही कमरे में अलग-अलग गतिविधियां चलने से पढ़ाई में ध्यान नहीं लग पाता है. प्रयोगशाला और लाइब्रेरी की सुविधा भी ठीक से नहीं मिल पाती.
छात्रा काजल कुमारी ने बताया कि कमरे के अभाव में हमलोग की पढ़ाई बाधित हो रही है. विषयवार शिक्षकों का कमी है,जिससे पढ़ाई बाधित हो रहीं है.इंटर विज्ञान संकाय में शिक्षकों की कमी है.
छात्रा रेशमी कुमारी ने बताया कि विषय वार्षिक को की कमी से हम लोगों की पढ़ाई बाधित हो रही है. शिक्षा विभाग को चाहिए की विषय वार शिक्षकों की नियुक्ति के साथ-साथ विद्यालय का अपना भवन निर्माण कराया जाए.
प्रधानाध्यापक ने रखी मांग
विद्यालय के प्रधानाध्यापक मो असलम ने बताया कि विद्यालय को उच्च माध्यमिक का दर्जा मिलने के बाद छात्र संख्या में लगातार वृद्धि हुई है, लेकिन उसी अनुपात में शिक्षकों और कमरों की व्यवस्था नहीं हो सकी है. कई बार विभाग को पत्र भेजकर शिक्षकों की नियुक्ति और अतिरिक्त भवन निर्माण की मांग की गई है. उन्होंने आगे कहा कि अगर जल्द ही शिक्षकों की नियुक्ति और आधारभूत सुविधाओं में सुधार नहीं किया गया, तो छात्रों के भविष्य पर इसका नकारात्मक असर पड़ सकता है.
व्यवस्था सुधार की जरूरत
स्थानीय लोगों का कहना है कि सरकार द्वारा विद्यालय को उच्च माध्यमिक का दर्जा तो दे दिया गया, लेकिन मूलभूत सुविधाओं और संसाधनों की अनदेखी की जा रही है. ऐसे में शिक्षा की गुणवत्ता प्रभावित होना स्वाभाविक है. ग्रामीणों और अभिभावकों ने शिक्षा विभाग से मांग की है कि विद्यालय में जल्द से जल्द विषयवार शिक्षकों की नियुक्ति की जाए और अतिरिक्त कक्षों का निर्माण कराया जाए, ताकि छात्र-छात्राओं को बेहतर शैक्षणिक वातावरण मिल सके.
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