Aurangabad News : मगध क्षेत्र की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना उत्तर कोयल मुख्य नहर अभी मदनपुर, आमस, टिकारी, कोच और गुरुआ के किसानों की अपेक्षाओं पर खरी नहीं उतर पा रही है. नहर में पर्याप्त पानी उपलब्ध होने के बावजूद अंतिम छोर तक पानी नहीं पहुंच पा रहा है. इसका प्रमुख कारण मुख्य नहर की लाइनिंग, विभिन्न संरचनाओं और री-मॉडलिंग का कार्य अधूरा रहना बताया जा रहा है. खासकर झारखंड क्षेत्र में एक्वाडक्ट का कार्य पूरा नहीं होने से नहर के जल प्रवाह में बाधा उत्पन्न हो रही है. वर्तमान में वाप्कोस ने खरीफ मौसम को देखते हुए नहर निर्माण और री-मॉडलिंग से जुड़े कई कार्य करीब चार माह के लिए अस्थायी रूप से स्थगित कर रखे हैं.
भीम बराज में पर्याप्त पानी, फिर भी किसानों की परेशानी बरकरार
पलामू जिले के मोहम्मदगंज स्थित भीम बराज में फिलहाल पानी की कमी नहीं है. बराज से दायीं मुख्य नहर में निर्धारित ड्रॉइंग डिस्चार्ज के अनुसार पानी छोड़ा जा रहा है. वहीं, बराज का पौंड लेवल बनाए रखने के बाद 18 हजार क्यूसेक पानी डाउनस्ट्रीम में नदी की ओर बहाया जा रहा है. इसके बावजूद नहर के अंतिम छोर के किसान सिंचाई संकट का सामना कर रहे हैं. जल संसाधन विभाग के अनुसार झारखंड क्षेत्र में नहर का री-मॉडलिंग कार्य 45 प्रतिशत से अधिक अधूरा है. कई पुल-पुलिया की अब तक कास्टिंग भी नहीं हुई है.
एक्वाडक्ट पूरा होने पर क्षमता के अनुरूप होगा नहर का संचालन
अधिकारियों ने बताया कि निर्माण के दौरान मुख्य नहर में एक ही एक्वाडक्ट बनाया गया था. री-मॉडलिंग के दौरान इसे डबल करने का प्रावधान है. विभाग का मानना है कि एक्वाडक्ट डबल होने के बाद नहर की जल प्रवाह क्षमता में सुधार होगा और क्षमता के अनुरूप पानी छोड़ा जा सकेगा. विदित हो कि करीब एक दशक से उत्तर कोयल मुख्य नहर सिंचाई परियोजना मृतप्राय स्थिति में थी. औरंगाबाद के तत्कालीन सांसद सुशील कुमार सिंह के प्रयास से वर्षों से लंबित सिंचाई परियोजना को दोबारा गति मिली. पूर्व सांसद ने बताया कि री-मॉडलिंग कार्य पूरा होने के बाद कमांड क्षेत्र के किसानों को धान की खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा. इससे किसानों को अकाल और सुखाड़ की मार से राहत मिलेगी.
तात्कालिक व्यवस्था के तहत हो रहा नहर का संचालन
जल संसाधन विभाग के अधीक्षण अभियंता संजीव कुमार ने बताया कि वर्षाभाव के कारण तात्कालिक व्यवस्था के तहत मुख्य नहर का संचालन किया जा रहा है. रविवार को मुख्य नहर में 2,087 क्यूसेक पानी छोड़ा गया. इसमें झारखंड क्षेत्र के 103 आरडी पर बिहार को 972 क्यूसेक पानी प्राप्त हो रहा है. इसमें 647 क्यूसेक पानी नवीनगर में खपत हो रहा है, जबकि अंबा को 325 क्यूसेक पानी मिल रहा है. अंबा डिवीजन क्षेत्र में फिलहाल महुअरी नहर का संचालन किया जा रहा है और सदर डिवीजन को 200 क्यूसेक पानी उपलब्ध कराया जा रहा है.
री-मॉडलिंग पूरी होने पर 2,979 क्यूसेक तक बढ़ेगी क्षमता
जल संसाधन विभाग के चीफ इंजीनियर अर्जुन प्रसाद सिंह ने बताया कि निर्माण कार्य के दौरान नहर में एक ही एक्वाडक्ट बनाया गया था, जिससे जल प्रवाह में अवरोध उत्पन्न हो रहा था. री-मॉडलिंग के दौरान एक्वाडक्ट को डबल किया जाना है. इसके पूरा होने के बाद नहर में क्षमता के अनुरूप 2,979 क्यूसेक पानी छोड़ा जा सकेगा. इससे नहर के कमांड क्षेत्र में सिंचाई सुविधा बेहतर होने की उम्मीद है.
वर्षों से लंबित परियोजना को मिली थी दोबारा गति
गौरतलब है कि करीब एक दशक पहले उत्तर कोयल नहर परियोजना लगभग मृतप्राय स्थिति में पहुंच गयी थी. तत्कालीन सांसद सुशील कुमार सिंह के प्रयास से वर्षों से लंबित सिंचाई परियोजना को दोबारा गति मिली. पूर्व सांसद का कहना है कि री-मॉडलिंग कार्य पूरा होने के बाद कमांड क्षेत्र के किसानों को धान की खेती के लिए पर्याप्त पानी उपलब्ध होगा और उन्हें अकाल-सुखाड़ की मार से राहत मिलेगी.
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