औरंगाबाद के जम्होर पितृपक्ष मेला को मिला राजकीय दर्जा, सदियों पुरानी परंपरा को मिली नई पहचान

बिहार के औरंगाबाद जिले में स्थित ऐतिहासिक जम्होर पितृपक्ष मेला को अब राजकीय दर्जा प्राप्त हो गया है। यह फैसला स्थानीय लोगों और आयोजकों के लिए खुशी की बात है, और इससे सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा को नई पहचान मिलेगी।

Aurangabad News: औरंगाबाद जिले के ऐतिहासिक और पौराणिक महत्व वाले जम्होर स्थित पितृपक्ष मेला महोत्सव को बिहार सरकार के कला, संस्कृति एवं युवा विभाग ने राजकीय दर्जा प्रदान किया है. इस फैसले के बाद सामाजिक कार्यकर्ताओं, महोत्सव आयोजन समिति और स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है. सरकार ने मेले के बेहतर आयोजन और श्रद्धालुओं की सुविधाओं के विस्तार के लिए पांच लाख रुपये की राशि भी स्वीकृत की है.

गयाजी से पहले यहां होता है प्रथम पिंडदान

आश्विन माह के कृष्ण पक्ष में हर वर्ष गयाजी की तर्ज पर औरंगाबाद के जम्होर स्थित पुनपुन-बटाने संगम के पास विष्णुधाम परिसर में श्रद्धालु प्रथम पिंडदान करते हैं. धार्मिक मान्यता के अनुसार गया में पिंडदान से पहले यहां पिंडदान करना अत्यंत शुभ माना जाता है. प्रथम पिंडदान के बाद श्रद्धालु भगवान विष्णु का दर्शन कर गयाजी के लिए रवाना होते हैं. इस परंपरा का पालन सदियों से किया जा रहा है और देश के विभिन्न राज्यों से श्रद्धालु यहां पहुंचते हैं.

धर्मशाला और रेलवे स्टेशन बने आस्था के प्रतीक

इतिहास के अनुसार कोलकाता के प्रसिद्ध उद्योगपति सेठ सूरजमल ने पुनपुन नदी के तट पर श्रद्धालुओं के ठहरने के लिए विशाल धर्मशाला का निर्माण कराया था. यात्रियों की सुविधा के लिए भारतीय रेलवे ने अनुग्रह नारायण पुनपुन घाट स्टेशन भी बनाया था. पितृपक्ष मेले के दौरान आज भी लगभग 15 दिनों तक कई मेल और एक्सप्रेस ट्रेनों का यहां ठहराव होता है. हालांकि समय के साथ टिकट घर बंद हो गया और अब उसके अवशेष ही शेष हैं.

उपेक्षा के कारण फीकी पड़ने लगी थी पहचान

स्थानीय लोगों का कहना है कि प्रशासनिक उपेक्षा और पर्याप्त प्रचार-प्रसार के अभाव में पिछले कुछ वर्षों में जम्होर पितृपक्ष मेला अपनी पहचान खोता जा रहा था. रेलवे द्वारा पुराने पिंडदान स्थल की घेराबंदी किए जाने के बाद श्रद्धालु अब विष्णुधाम परिसर में ही पिंडदान करते हैं. पौराणिक मान्यता है कि भगवान श्रीराम और माता सीता ने भी गया जाने से पहले इसी स्थान पर प्रथम पिंडदान किया था.

लगातार प्रयास के बाद मिली बड़ी उपलब्धि

विष्णुधाम महोत्सव आयोजन समिति के अध्यक्ष अजीत कुमार सिंह और सहायक महासचिव राजीव कुमार सिंह 'बब्लू' ने बताया कि राजकीय दर्जा दिलाने की मांग लगातार जिला प्रशासन और राज्य सरकार के समक्ष उठाई जाती रही. आखिरकार सरकार ने इस ऐतिहासिक धार्मिक आयोजन को राजकीय मान्यता देते हुए पांच लाख रुपये की राशि स्वीकृत कर दी. समिति ने इस उपलब्धि के लिए जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा, जिला कला एवं संस्कृति पदाधिकारी, प्रखंड विकास पदाधिकारी और जम्होर निवासी प्रभाकर कुमार के प्रति आभार व्यक्त किया.

धार्मिक पर्यटन को मिलेगा नया विस्तार

महोत्सव आयोजन समिति का मानना है कि राजकीय दर्जा मिलने से जम्होर पितृपक्ष मेला राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान बनाएगा. इससे श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ेगी, धार्मिक पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी मजबूती मिलेगी. साथ ही सदियों पुरानी धार्मिक परंपरा के संरक्षण और प्रचार-प्रसार को नई गति मिलेगी.

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