महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाना सरकार का उद्देश्य : डीएम

नारी शक्ति योजना से महिलाएं हो रहीं आर्थिक संबल, योजना की भेजी गयी राशि

नारी शक्ति योजना से महिलाएं हो रहीं आर्थिक संबल, योजना की भेजी गयी राशि औरंगाबाद शहर. मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना आर्थिक रूप से कमजोर महिलाओं के लिए संबल साबित हो रही है. बुधवार को जिले में महिला सशक्तीकरण की दिशा में एक पहल करते हुए जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा ने मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के अंतर्गत सामाजिक पुनर्वास कोर्स के तहत चयनित 15 पीड़ित एवं जरूरतमंद महिलाओं को 10 हजार रुपये प्रति महिला की आर्थिक सहायता प्रदान की. यह राशि महिलाओं के बैंक खातों में आरटीजीएस-एनईएफटी के माध्यम से सीधे हस्तांतरित की गयी, जिससे योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और समयबद्धता सुनिश्चित हो सकी. लाभुक महिलाओं ने बताया कि वे इस राशि का उपयोग लघु उद्योग और स्वरोजगार प्रारंभ करने के लिए करेंगी. उन्होंने सिलाई कार्य, ब्यूटी पार्लर, छोटी दुकान, सब्जी-फल विक्रय, अगरबत्ती निर्माण और हस्तशिल्प जैसे व्यवसाय शुरू करने की योजना साझा की. महिलाओं ने कहा कि यह आर्थिक सहयोग उन्हें आत्मनिर्भर बनने की दिशा में मजबूत आधार देगा और उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में सुधार लाने में सहायक होगा. डीएम अभिलाषा शर्मा ने कहा कि मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना केवल आर्थिक सहायता प्रदान करने तक सीमित नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य महिलाओं को सम्मानजनक जीवन, आत्मविश्वास और आत्मनिर्भरता की दिशा में प्रेरित करना है. उन्होंने महिलाओं को राशि का सही और योजनाबद्ध उपयोग करने तथा अपने व्यवसाय को चरणबद्ध रूप से आगे बढ़ाने के लिए प्रोत्साहित किया. साथ ही जिला प्रशासन की ओर से भविष्य में आवश्यक मार्गदर्शन और सहयोग उपलब्ध कराने का आश्वासन भी दिया. इस अवसर पर डीएम ने पीड़ित महिलाओं के बीच कंबल का वितरण भी किया, जिससे ठंड में उन्हें राहत मिल सके. कार्यक्रम में जिला प्रोग्राम पदाधिकारी, जिला परियोजना प्रबंधन केंद्र के प्रशासक और अन्य संबंधित अधिकारी उपस्थित थे. सभी अधिकारियों ने योजना के उद्देश्यों, लाभों और क्रियान्वयन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी दी और महिलाओं को अन्य सरकारी जनकल्याणकारी योजनाओं से जुड़ने के लिए प्रोत्साहित किया. मुख्यमंत्री नारी शक्ति योजना के तहत किये गये इस प्रयास को औरंगाबाद जिले में महिला सशक्तिकरण और सामाजिक पुनर्वास की दिशा में एक सराहनीय और प्रेरणादायी कदम माना जा रहा है. इससे न केवल महिलाओं को आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि वे समाज में आत्मसम्मान के साथ अपनी पहचान भी स्थापित कर सकेंगी.

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