पूर्णाहुति व भंडारे के साथ आठ दिवसीय महायज्ञ संपन्न

इस दौरान क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आयेश्रद्धालुओं व भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर मंगल कामना की

देव. देव नगर पंचायत के थाना के समीप चल रहे मां काली एवं कार्तिक की प्राण के प्राण-प्रतिष्ठा व आठ दिवसीय यज्ञ का समापन हवन-पूजन एवं भव्य भंडारे के साथ संपन्न हो गया. इस दौरान क्षेत्र के विभिन्न गांवों से आयेश्रद्धालुओं व भक्तों ने प्रसाद ग्रहण कर मंगल कामना की. प्राण प्रतिष्ठा के लिए यज्ञ के अंतिम दिन सैकड़ों श्रद्धालुओं की भीड़ जुटी हुई थी. भीड़ के चलते मंदिर परिसर में देर शाम तक गहमा-गहमी का माहौल कायम रहा. इस बीच श्रद्धालुओं द्वारा लगाये रहे जयकारे व जयघोष से आसपास के इलाके में भक्ति की धारा प्रवाहित हो रही थी. नगर अध्यक्ष पिंटू साहिल, उपाध्यक्ष गोलू गुप्ता, समाजसेवी लक्ष्मण गुप्ता, समाजसेवी मोनू सिंह, समाजसेवी शक्ति मिश्रा, समाजसेवी आलोक सिंह, समाजसेवी बिपिन सिंह, गोपाल मिश्रा, मदन मोहन पाठक, धीरज पांडेय, दिनेश पाठक, विनोद सिंह, विनोद यादव, मुकेश सिंह, राम प्रवेश सिंह, बिटू सिंह, दीपक गुप्ता, अवंत सिंह, पवन पांडेय, मुकुल सिंह, बिपिन कुमार, उपेंद्र चौधरी, बलेश गुप्ता, रॉबिन सिंह, दीपक धनराज, पीयूष सिंह, नरेंद्र साव, रविशंकर पांडेय, चंदन सिंह, सौरभ सिंह, बालेश्वर यादव, गोरख साव, कंचन देव, उपेंद्र यादव, उमेश कुमार, लालजी, विकास कुमार, लडूस कुमार, संदीप दूबे, लवकुश कुमार, दिनेश कुमार समेत सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए. यज्ञ समापन के अंतिम दिन भी समाजसेवी शक्ति मिश्रा द्वारा देव के थाना के समीप में विशाल भंडारा का आयोजन किया गया, जिसमें सैकड़ों श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. मां काली एवं कार्तिक जी के प्राण प्रतिष्ठा पूरी होने के बाद यज्ञाचार्य स्वामी विष्णु चित आचार्य के नेतृत्व में गिरजा शंकर मिश्र, शशांक मिश्रा, सुशील मिश्र, अवधेश मिश्रा, अरुण मिश्रा, हरिदास जी महाराज, बबलू शास्त्री ने वैदिक मंत्रोच्चारण के बीच पारंपरिक विधि से विशेष पूजा-अर्चना की. इसके बाद आठ दिवसीय महायज्ञ का समापन शास्त्रोक्त विधि से कर दिया गया. इससे पहले श्रद्धालुओं को कथा सुनाते हुए कथा वाचिका साध्वी शिवांजलि किशोरी ने कहा कि प्रकृति के 24 तत्वों से संबंध करके जीव बंधन में बांधता है. जो मनुष्य में अहंकार पैदा करता है. अहंकार ईश्वर से मनुष्य को दूर कर देता है. उन्होंने कहा कि हम सभी को अहंकार से बचाना चाहिए. अगर बच्चों को माता-पिता संस्कार और शिक्षा न दें तो वह माता-पिता के लिए कष्टदायक बन जाता है. उन्होंने कहा कि बच्चों के लिए संस्कार युक्त शिक्षा जरूरी हो. महायज्ञ को सफलता पूर्वक संपन्न कराने में पूरे ग्रामवासियों का सराहनीय सहयोग रहा.

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By Sudhir kumar singh

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