रफीगंज. प्रखंड के बौर पंचायत अंतर्गत पडरिया गांव में सिंचाई के लिए बनी 52 कड़ी कैनाल को लेकर विवाद गहरा गया है. पडरिया के ग्रामीणों ने बैठक कर आरोप लगाया कि वर्ष 1978 में जल संसाधन विभाग द्वारा सकीरगंज होते हुए कैनाल के माध्यम से सिंचाई की सुविधा उपलब्ध कराई गई थी, लेकिन वर्तमान में सकीरगंज के कुछ लोग कैनाल में नाली का पानी, घरों का कचरा, खैर की लकड़ी, पत्तल तथा अन्य अपशिष्ट पदार्थ डालकर उसका मुहाना बंद कर रहे हैं. ग्रामीणों का कहना है कि कैनाल बाधित होने से पडरिया के किसानों की खरीफ फसल प्रभावित हो रही है और सिंचाई का गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है. आरोप है कि 52 कड़ी कैनाल के हिस्से को काटकर कुछ लोगों ने खेती भी शुरू कर दी है, जिससे पानी का प्रवाह पूरी तरह प्रभावित हो रहा है.इस मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिलाधिकारी, पुलिस अधीक्षक तथा कार्यपालक अभियंता, सिंचाई विभाग, औरंगाबाद को लिखित आवेदन देकर तत्काल जांच एवं अतिक्रमण हटाने की मांग की है. ग्रामीणों ने कहा कि पडरिया और सकीरगंज के बीच तनाव की स्थिति बनी हुई है और समय रहते प्रशासन ने हस्तक्षेप नहीं किया तो कभी भी अप्रिय घटना हो सकती है.बैठक में सर्वसम्मति से निर्णय लिया गया कि यदि स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नामजद प्राथमिकी दर्ज कराई जाएगी. साथ ही जिला प्रशासन से 52 कड़ी कैनाल को अतिक्रमण मुक्त कराकर किसानों के लिए सिंचाई व्यवस्था बहाल करने की मांग की गई. बैठक में विजय सिंह, अखिलेश शर्मा, दिनेश शर्मा, कमलेश कुमार, सुरेंद्र प्रसाद, मनोज यादव, ओमकार नाथ पूर्वे सहित सैकड़ों ग्रामीण उपस्थित थे.
52 कड़ी कैनाल पर अतिक्रमण को लेकर बढ़ा विवाद
रफीगंज के पडरिया गांव में 52 कड़ी कैनाल पर अतिक्रमण से सिंचाई संकट गहरा गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से तत्काल कार्रवाई और अतिक्रमण हटाने की मांग की है।

52 कड़ी कैनाल पर अतिक्रमण को लेकर बढ़ा विवाद