Aurangabad News : सावन की अंतिम सोमवारी के अवसर पर देवकुंड स्थित बाबा दूधेश्वरनाथ मंदिर में आस्था का महासैलाब उमड़ पड़ा. सोमवार को रात 1 बजकर 20 मिनट से देर शाम तक 80 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा दूधेश्वरनाथ का जलाभिषेक कर सुख, शांति, समृद्धि और खुशहाली की कामना की. हर-हर महादेव और बोल बम के जयघोष से पूरा देवकुंड गुंजायमान रहा.
सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर रविवार शाम से ही देवकुंड में कांवरियों और श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला शुरू हो गया था. पटना के गायघाट समेत विभिन्न स्थानों से गंगाजल लेकर बड़ी संख्या में कांवरिये पैदल देवकुंड पहुंचे. सोमवार की अहले सुबह कांवरियों और श्रद्धालुओं ने बाबा दूधेश्वरनाथ का जलाभिषेक किया. सुबह होते ही मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं की लंबी कतार लग गई. श्रद्धालु घंटों कतार में खड़े होकर अपनी बारी का इंतजार करते रहे. भीड़ लगातार बढ़ती रही और देर शाम तक मंदिर में जलाभिषेक का सिलसिला जारी रहा.
प्रशासन ने संभाली व्यवस्था, बनाया गया नियंत्रण कक्ष
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए देवकुंड मंदिर परिसर में नियंत्रण कक्ष बनाया गया था. यहां से पूरे मेला क्षेत्र और मंदिर परिसर की गतिविधियों पर नजर रखी जा रही थी. दाउदनगर एसडीओ अमित राजन, एसडीपीओ अशोक कुमार दास सहित अन्य अधिकारी मौके पर मौजूद रहकर व्यवस्था की निगरानी करते रहे. अधिकारियों ने समय-समय पर मेला क्षेत्र और मंदिर परिसर का जायजा लिया तथा सुरक्षाकर्मियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए.
बोले एसडीओ, पहले से की गई थी व्यापक तैयारी
एसडीओ अमित राजन ने बताया कि अंतिम सोमवारी को लेकर प्रशासन की ओर से पहले से ही व्यापक तैयारी की गई थी. श्रद्धालुओं को किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसका विशेष ध्यान रखा गया. मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में भीड़ को नियंत्रित करने के लिए आवश्यक व्यवस्था की गई थी. श्रद्धालुओं के आने-जाने के मार्ग को व्यवस्थित रखा गया. वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाकर जाम की समस्या से बचने का प्रयास किया गया. सुरक्षा व्यवस्था की लगातार निगरानी की गई और जरूरत के अनुसार दिशा-निर्देश दिए गए. प्रशासन की मुस्तैदी के कारण अंतिम सोमवारी का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ.
अतिरिक्त बल के साथ 124 ग्राम रक्षा दल के जवान तैनात
श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर पुलिस प्रशासन की ओर से विशेष व्यवस्था की गई थी. विभिन्न स्थानों पर पुलिस बल की तैनाती की गई थी. इसके अलावा अतिरिक्त पुलिस बल भी लगाया गया था. भीड़ नियंत्रण और श्रद्धालुओं की सहायता के लिए 124 ग्राम रक्षा दल के जवानों को तैनात किया गया था. जवान मेला क्षेत्र, मंदिर परिसर और प्रमुख मार्गों पर लगातार सक्रिय रहे.
बोले एसडीपीओ, सुरक्षा व्यवस्था पर लगातार रखी गई नजर
एसडीपीओ अशोक कुमार दास ने बताया कि अंतिम सोमवारी को लेकर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए थे. श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई थी. इसके साथ ही 124 ग्राम रक्षा दल के जवानों को भी अलग-अलग स्थानों पर लगाया गया था. मंदिर परिसर और मेला क्षेत्र में जवान लगातार भीड़ पर नजर रख रहे थे.
श्रद्धालुओं के आवागमन को व्यवस्थित रखने के लिए प्रमुख मार्गों पर सुरक्षा कर्मी तैनात रहे. किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए पुलिस पदाधिकारियों को सतर्क रखा गया था. पुलिस और ग्राम रक्षा दल की सक्रियता से अंतिम सोमवारी शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुई.
कांवरियों के रहने और भोजन की भी की गई व्यवस्था
देवकुंड पहुंचने वाले कांवरियों की सुविधा को लेकर भी विशेष व्यवस्था की गई थी. मठाधीश कन्हैया नंद पुरी की देखरेख में कांवरियों के ठहरने और भोजन की व्यवस्था की गई. दूरदराज से आने वाले कांवरियों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसके लिए सेवाभावी लोग लगातार जुटे रहे. ग्राम रक्षा दल की व्यवस्था में भी सहयोग किया गया.
बोले मठाधीश, श्रद्धालुओं की सेवा को बाबा की सेवा माना
मठाधीश कन्हैया नंद पुरी ने बताया कि सावन की अंतिम सोमवारी को लेकर देवकुंड में विशेष व्यवस्था की गई थी. दूरदराज से आने वाले कांवरियों के रहने के लिए समुचित व्यवस्था की गई थी. कांवरियों के लिए भोजन और पानी की भी व्यवस्था की गई थी. कांवरियों को किसी तरह की परेशानी नहीं हो, इसके लिए सेवाभावी लोग लगातार लगे रहे.
उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सेवा को बाबा दूधेश्वरनाथ की सेवा के रूप में माना गया. ग्राम रक्षा दल की भी पूरी व्यवस्था की गई थी और जवानों ने व्यवस्था संभालने में सहयोग किया. सभी के सहयोग से सावन की अंतिम सोमवारी पर देवकुंड में शांतिपूर्ण और भक्तिमय माहौल बना रहा.
मेला क्षेत्र में वाहनों के प्रवेश पर रही रोक
थानाध्यक्ष निरंजन कुमार ने बताया कि श्रद्धालुओं की भीड़ को देखते हुए मेला क्षेत्र में वाहनों के प्रवेश पर रोक लगाई गई थी. हसपुरा रोड, बनतारा रोड और शहर तेलपा रोड समेत प्रमुख मार्गों पर बैरिकेडिंग की गई थी. सुरक्षा कर्मियों की तैनाती कर वाहनों को निर्धारित स्थानों पर रोका गया. इसके बाद श्रद्धालुओं को पैदल मंदिर की ओर जाने की व्यवस्था की गई. इससे मेला क्षेत्र में जाम की स्थिति उत्पन्न नहीं हुई और श्रद्धालुओं के आवागमन को व्यवस्थित रखने में मदद मिली.
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महिलाओं और युवतियों में भी दिखा खास उत्साह
अंतिम सोमवारी को लेकर सुहागिन महिलाओं और युवतियों में भी काफी उत्साह देखने को मिला. बड़ी संख्या में महिलाओं ने सोमवारी का व्रत रखा. सुबह स्नान और पूजा करने के बाद महिलाएं देवकुंड पहुंचीं और बाबा दूधेश्वरनाथ का जलाभिषेक किया. मेला क्षेत्र में महिलाओं ने सिंदूर, टिकुली, चूड़ी समेत अन्य सामानों की खरीदारी की. महिलाओं ने अपने पति की लंबी उम्र और परिवार की सुख-शांति एवं समृद्धि की कामना की.
बच्चों के लिए झूला और चरखा रहा आकर्षण
देवकुंड के पशु मेला क्षेत्र में बच्चों के मनोरंजन के लिए लगाए गए झूले और चरखे पर भी भीड़ रही. बड़ी संख्या में बच्चे अपने परिजनों के साथ मेला पहुंचे. बच्चों ने झूला और चरखा का आनंद लिया. वहीं, खिलौने, मिठाई और खानपान की दुकानों पर भी श्रद्धालुओं की भीड़ देखी गई.
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सहस्त्रधारा तालाब में सुरक्षा पर रही विशेष नजर
देवकुंड के ऐतिहासिक सहस्त्रधारा तालाब में स्नान करने वाले श्रद्धालुओं की सुरक्षा को लेकर भी प्रशासन की ओर से विशेष नजर रखी गई. एनडीआरएफ की दो टीमों को लगाया गया था. श्रद्धालुओं से गहरे पानी में नहीं जाने और सावधानी के साथ स्नान करने की अपील की गई. सुरक्षा कर्मियों और स्वयंसेवकों को भीड़ पर नजर रखने के लिए लगाया गया था. प्रशासन की ओर से लोगों से किसी तरह का जोखिम नहीं उठाने की अपील की गई.
देर शाम तक गूंजता रहा हर-हर महादेव का जयघोष
सावन की अंतिम सोमवारी पर सुबह से देर शाम तक देवकुंड में भक्ति का माहौल बना रहा. मंदिर परिसर में लगातार हर-हर महादेव और बोल बम के जयकारे गूंजते रहे. अनुमान के अनुसार अंतिम सोमवारी पर 80 हजार से अधिक श्रद्धालुओं ने बाबा दूधेश्वरनाथ का जलाभिषेक किया. श्रद्धालुओं ने बाबा का दर्शन और पूजा-अर्चना कर अपने परिवार की सुख-शांति और समृद्धि की कामना की.
प्रशासन, पुलिस, ग्राम रक्षा दल, स्वयंसेवकों और स्थानीय लोगों के सहयोग से अंतिम सोमवारी का आयोजन शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हुआ.
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