Aurangabad News: एक पुराने अपहरण एवं हत्या के मामले में औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय ने फैसला सुनाते हुए दोषी को उम्रकैद (आजीवन कारावास) की सजा सुनाई है. प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजीव रंजन कुमार ने रिसियप थाना कांड संख्या-37/11 में सुनवाई करते हुए प्राथमिक अभियुक्त सुरेंद्र मेहता (निवासी- गड़रा, रिसियप) को दोषी करार दिया और विभिन्न धाराओं के तहत उम्रकैद व कुल 3.50 लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई.
अपहरण, हत्या और साक्ष्य मिटाने में सुनाई गई सजा
लोक अभियोजक अजय कुमार ने बताया कि अदालत ने भारतीय दंड संहिता (IPC) की धारा 364 के तहत उम्रकैद एवं 1 लाख रुपये जुर्माना, धारा 302 के तहत उम्रकैद एवं 2 लाख रुपये जुर्माना तथा धारा 201 के तहत 5 वर्ष का सश्रम कारावास और 50 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई है. सभी सजाएं एक साथ चलेंगी. न्यायालय ने 10 जुलाई को अभियुक्त को नाबालिग विवेक कुमार के अपहरण, हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी ठहराते हुए न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया था.
2011 में बारात से लापता हुआ था मासूम, नहर से बरामद हुआ था शव
मामले की प्राथमिकी सूचक महेंद्र मेहता ने 17 जून 2011 को रिसियप थाने में दर्ज कराई थी. उन्होंने बताया था कि गांव में आई एक बारात के दौरान उनका नाबालिग पुत्र विवेक कुमार बारात के लोगों के साथ सो रहा था, जहां से अभियुक्त उसे बहला-फुसलाकर ले गया. घटना के लगभग तीन महीने बाद सिंचाई नहर से मासूम का शव बरामद हुआ था, जिसकी पहचान परिजनों ने शर्ट, बेल्ट और दांतों के आधार पर की थी.
जमीनी विवाद में दिया गया था वारदात को अंजाम
लोक अभियोजक के अनुसार वादी और अभियुक्त के बीच पहले से ही जमीन को लेकर पुराना विवाद चल रहा था. इसी रंजिश में मासूम का अपहरण कर उसकी हत्या कर दी गई थी. अदालत द्वारा ऐतिहासिक फैसला सुनाए जाने के बाद पीड़ित परिवार ने न्यायालय के प्रति संतोष व्यक्त किया है.
