औरंगाबाद में नाबालिग से जबरन शादी करने वाले दोषी को 20 साल की सजा, कोर्ट ने पीड़िता को मुआवजा देने का भी दिया आदेश

औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय ने एक नाबालिग को बहला-फुसलाकर जबरन शादी करने के मामले में अभियुक्त गुंजन सिंह बंदेया को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. पॉक्सो एक्ट और बीएनएस की धाराओं में यह सजा सुनाई गई है, साथ ही पीड़िता को मुआवजा देने का भी आदेश दिया गया है.

Aurangabad News: औरंगाबाद व्यवहार न्यायालय के स्पेशल पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश लक्ष्मी कांत मिश्रा ने नाबालिग को बहला-फुसलाकर जबरन शादी करने के मामले में दोषी करार दिए गए अभियुक्त गुंजन सिंह बंदेया को 20 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई है. यह फैसला पॉक्सो केस संख्या-79/25 और कासमा थाना कांड संख्या-87/25 में सजा के बिंदु पर सुनवाई के बाद सुनाया गया.

बीएनएस और पॉक्सो एक्ट की धाराओं में सुनाई गई सजा

स्पेशल पीपी शिवलाल मेहता ने बताया कि 6 जुलाई 2026 को अदालत ने अभियुक्त को बीएनएस और पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं में दोषी ठहराया था. इसके बाद 10 जुलाई को सजा पर सुनवाई करते हुए कोर्ट ने पॉक्सो एक्ट की धारा 4(2) और बीएनएस की धारा 65(1) के तहत 20 वर्ष का सश्रम कारावास तथा 30 हजार रुपये जुर्माने की सजा सुनाई. वहीं बीएनएस की धारा 87 के तहत सात वर्ष का कारावास और 20 हजार रुपये जुर्माने की सजा भी दी गई. अदालत ने दोनों सजाएं साथ-साथ चलाने का आदेश दिया.

आठ गवाहों की गवाही के बाद आया फैसला

अभियोजन पक्ष की ओर से मामले में कुल आठ गवाहों की गवाही कराई गई. अदालत ने यह भी माना कि अभियुक्त पहले चार माह 22 दिन न्यायिक हिरासत में रह चुका है. इस अवधि का समायोजन सजा में किया जाएगा. साथ ही बिहार पीड़ित प्रतिकर योजना के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकार को पीड़िता को एक लाख रुपये का मुआवजा दिलाने की प्रक्रिया पूरी करने का निर्देश दिया गया है.

नाबालिग को बहला-फुसलाकर कराई गई थी जबरन शादी

अधिवक्ता सतीश कुमार स्नेही ने बताया कि पीड़िता के पिता ने 28 जून 2025 को कासमा थाना में प्राथमिकी दर्ज कराई थी. शिकायत के अनुसार उनकी नाबालिग पुत्री अल्ट्रासाउंड कराने रफीगंज गई थी, जहां से अभियुक्त उसे बहला-फुसलाकर अपने घर ले गया. अगले दिन देवकुंड ले जाकर उससे जबरन शादी कर ली. पीड़िता ने रोते हुए फोन पर अपने पिता को पूरी घटना की जानकारी दी, जिसके बाद मामला दर्ज कराया गया.

चार दिन में सुनाई गई सजा

मामले में 31 अक्टूबर 2025 को आरोप गठन किया गया था. त्वरित सुनवाई पूरी होने के बाद स्पेशल पॉक्सो कोर्ट ने दोषसिद्धि के केवल चार दिन बाद ही सजा सुनाकर मामले का निष्पादन कर दिया.

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