भीम बराज लबालब फिर भी मगध के खेत प्यासे: झारखंड में अधूरी री-मॉडलिंग और एक्वाडक्ट के कारण बिहार को नहीं मिल रहा उत्तर कोयल नहर का पूरा पानी

उत्तर कोयल नहर में पानी होने के बावजूद झारखंड में अधूरा काम और अवैध आउटलेट के कारण मगध के किसानों को सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है.

Aurangabad News: झारखंड के मोहम्मदगंज स्थित उत्तर कोयल जलाशय परियोजना का भीम बराज इन दिनों पानी से लबालब भरा हुआ है. पिछले दो सप्ताह से कोयल नदी लगातार उफान पर है और बराज का पौंड लेवल मेंटेन करने के बाद रोजाना हजारों क्यूसेक सरप्लस पानी नदी में बहाया जा रहा है. इसके बावजूद मगध प्रमंडल के औरंगाबाद और गया जिले के किसानों को खरीफ फसलों की सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी नसीब नहीं हो रहा है.

नहर में भरपूर जलराशि होने के बाद भी अवैध आउटलेट और झारखंड प्रभाग में पानी के रिसाव/रोक के चलते आधा से अधिक पानी झारखंड सीमा के भीतर ही सिमट कर रह जा रहा है.

झारखंड में 60% काम अधूरा, एक्वाडक्ट और क्रॉस रेगुलेटर बने बड़ी बाधा

मगध क्षेत्र की लाइफलाइन मानी जाने वाली इस सबसे बड़ी सिंचाई परियोजना का लाभ औरंगाबाद के मदनपुर, कुटुंबा, अंबा तथा गया जिले के आमस, कोच, टिकारी और गुरुआ के किसानों तक नहीं पहुंचने का मुख्य कारण झारखंड हिस्से में अधूरा निर्माण कार्य है:

  • अपूर्ण संरचनाएं: विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, झारखंड प्रभाग में आज भी 60 प्रतिशत से अधिक री-मॉडलिंग और स्ट्रक्चर निर्माण का कार्य अधूरा पड़ा है. कई पुल-पुलिया बिना कास्टिंग के जस के तस पड़े हैं.
  • एक्वाडक्ट की अड़चन: पहले केवल एक ही एक्वाडक्ट बना था, जिससे जल प्रवाह बाधित हो रहा है. 2979 क्यूसेक पानी की पूरी क्षमता से आपूर्ति के लिए इसे डबल किया जाना था, जो कार्य अधर में लटका है.
  • सफाई का अभाव: भीम बराज से लेकर 16 आरडी (RD) तक मुख्य नहर की तलछट सफाई तक नहीं कराई गई है. वर्ष 2018 में वाप्कोस (WAPCOS) द्वारा दो अलग-अलग पैकेजों में शुरू कराया गया री-मॉडलिंग कार्य करीब 8 वर्ष बीत जाने के बाद भी अधूरा है.

बराज से चला 2097 क्यूसेक पानी, बिहार बॉर्डर पहुंचते ही आधा हुआ

भीम बराज से मुख्य नहर में 2097 क्यूसेक पानी छोड़ा जा रहा है, लेकिन 103 आरडी स्थित बिहार सीमा तक पहुंचते-पहुंचते यह घटकर मात्र 1120 क्यूसेक रह जाता है.

अंबा डिवीजन के कार्यपालक अभियंता (Executive Engineer) विवेक कुमार ने बताया कि 1120 क्यूसेक में से अंबा को मात्र 495 क्यूसेक मिल रहा है, जबकि सदर प्रमंडल को महज 103 क्यूसेक पानी ही नसीब हो रहा है. इतने कम जलस्तर से शाखा नहरों को जैसे-तैसे संचालित किया जा रहा है, जिससे टेल-एंड (अंतिम छोर) के किसानों के खेत सूखे पड़े हैं.

मोहम्मदगंज भीम बराज से नहर में छोड़ा जा रहा पानी | Prabhat Khabar Network

'री-मॉडलिंग पूरा होते ही अंतिम छोर तक पहुंचेगा पानी': चीफ इंजीनियर

"झारखंड पोर्शन में अब तक मात्र एक क्रॉस रेगुलेटर का कार्य पूरा हुआ है, जबकि चार क्रॉस रेगुलेटर पूर्व की भांति पुराने ढांचे पर ही हैं. नौ एक्वाडक्ट पर अब भी कोई काम नहीं हुआ है. जीरो आरडी से लेकर 103 आरडी तक संरचनाओं का निर्माण अपूर्ण है. जैसे ही झारखंड हिस्से की री-मॉडलिंग पूरी होगी, मगध क्षेत्र के अंतिम छोर तक के किसानों को सिंचाई के लिए निर्बाध और पूरी क्षमता से पानी उपलब्ध कराया जा सकेगा." — अर्जुन प्रसाद सिंह, मुख्य अभियंता, जल संसाधन विभाग

Also Read: औरंगाबाद में सांप के काटने से 22 वर्षीय युवक की मौत, अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित किया


प्रभात खबर डिजिटल टॉप स्टोरी

लेखक के बारे में

By अंबुज कुमार

Read More
ePaper

अपने दैनिक समाचार अनुभव को और बेहतरीन बनाएं

सिर्फ ₹399 ₹149

एक साल के लिए

आज ही सब्सक्राइब करें

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >