Aurangabad News: (सुजीत कुमार सिंह) औरंगाबाद जिले के बंदेया थाना क्षेत्र में नक्सली संगठन का नाम लेकर रंगदारी मांगने और विकास कार्य को बाधित करने की कोशिश करने वाले छह लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है. औरंगाबाद पुलिस तथा एसटीएफ की संयुक्त कार्रवाई में आरोपियों के कब्जे से कई अवैध हथियार भी बरामद किए गए हैं.
पुलिस का दावा है कि गिरफ्तार आरोपी माओवादी संगठन का नाम इस्तेमाल कर ठेकेदारों और स्थानीय लोगों में दहशत फैलाकर लेवी वसूलने की योजना बना रहे थे.
तालाब खुदाई के दौरान मिला था धमकी भरा पत्र
जानकारी के अनुसार बंदेया थाना क्षेत्र के चपरा गांव में तालाब खुदाई का कार्य चल रहा था. इसी दौरान कार्यस्थल पर एक धमकी भरा पत्र पहुंचाया गया, जिसमें खुद को भाकपा (माओवादी) का सदस्य बताते हुए लेवी की मांग की गई थी.
पत्र में मांग पूरी नहीं होने पर गंभीर परिणाम भुगतने की चेतावनी भी दी गई थी. मामले को गंभीरता से लेते हुए बंदेया थाना में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू की गई.
मशीनों को जलाने की दी गई थी धमकी
जांच के दौरान 27 मई की देर रात तालाब खुदाई कार्य में लगे कर्मियों ने पुलिस को सूचना दी कि कुछ लोग मौके पर पहुंचकर काम बंद कराने और मशीनों को आग के हवाले करने की धमकी दे रहे हैं.
सूचना मिलते ही पुलिस टीम मौके पर पहुंची और मामले की जांच तेज कर दी. घटना की संवेदनशीलता को देखते हुए एसटीएफ को भी जांच में शामिल किया गया.
तकनीकी जांच से पुलिस को मिली सफलता
तकनीकी साक्ष्यों, आसूचना तंत्र और सीसीटीवी फुटेज के आधार पर पुलिस ने सबसे पहले गया जिले के टिकारी क्षेत्र से उदय कुमार को हिरासत में लिया. पूछताछ में मिली जानकारी के आधार पर चपरा गांव से संटू यादव को गिरफ्तार किया गया, जिसके पास से एक देशी कट्टा बरामद हुआ.
इसके बाद पुलिस ने चपरा बधार इलाके में छापेमारी कर दो अन्य अवैध हथियारों के साथ एक थ्री-नॉट-थ्री (303) रायफल और एक मास्केट बरामद किया.
कई जिलों में चलाया गया अभियान
अवैध हथियार बरामद होने के बाद पुलिस ने शस्त्र अधिनियम के तहत अलग से एक और प्राथमिकी दर्ज की. लगातार कार्रवाई के दौरान गया जिले के कोंच थाना क्षेत्र से चंद्रप्रकाश विश्वकर्मा, रंजीत कुमार उर्फ नन्हें तथा अनिल यादव उर्फ राजेंद्र यादव समेत अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया.
वहीं बंदेया थाना क्षेत्र से भी एक अन्य आरोपी को दबोचा गया.
पूछताछ में स्वीकार की संलिप्तता
पुलिस अधिकारियों के अनुसार पूछताछ में सभी आरोपियों ने घटना में अपनी संलिप्तता स्वीकार की है. प्रारंभिक जांच में यह सामने आया है कि आरोपी माओवादी संगठन का नाम लेकर ठेकेदारों और ग्रामीणों को डराने तथा रंगदारी वसूलने का प्रयास कर रहे थे.
संगठित गिरोह से संबंध की भी जांच
गिरफ्तार सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है. पुलिस अब यह भी जांच कर रही है कि उनका किसी संगठित आपराधिक गिरोह अथवा प्रतिबंधित संगठन से प्रत्यक्ष संबंध है या नहीं.
मामले में आगे की जांच जारी है और पुलिस पूरे नेटवर्क की पड़ताल में जुटी हुई है.
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