Aurangabad News: वट सावित्री के दिन खोया शिवम 4 साल बाद उसी व्रत के दिन मां को मिला, ओबरा थाने में मिलन देख रो पड़े लोग

Aurangabad News: वट सावित्री के दिन खोया शिवम 4 साल बाद उसी व्रत के दिन मां को मिला, ओबरा थाने में मिलन देख रो पड़े लोग जानिए पूरी खबर नीचे.

Aurangabad News: (ब्रजेश द्विवेदी) कुदरत के खेल और पुलिस की अथक महत्ता का एक ऐसा सुखद नजारा गुरुवार को ओबरा थाना परिसर में देखने को मिला, जिसने हर किसी की आंखें नम कर दीं. ठीक चार साल पहले, ‘वट सावित्री व्रत’ के ही दिन ओबरा के देवी मंदिर परिसर से अचानक गायब हुआ मासूम शिवम कुमार (पिता- अनूप पांडेय) गुरुवार को उसी व्रत के खास दिन अपनी मां की गोद में वापस लौट आया. 4 साल के लंबे और दर्दभरे इंतजार के बाद जब मां-बेटे का मिलन हुआ, तो थाना परिसर में मौजूद हर शख्स की सांसें थम गईं और आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े.

30 मई 2022 की वो काली रात: मंदिर परिसर से अचानक गायब हुआ था मासूम

इस भावुक कर देने वाली कहानी की शुरुआत 30 मई 2022 को हुई थी. मूल रूप से अरवल जिले के करपी थाना क्षेत्र के केयाल निवासी अनूप पांडेय का परिवार उस समय ओबरा के इमामबाड़ा रोड में एक किराये के मकान में रहता था. वट सावित्री पूजा के दिन उनका पुत्र शिवम अचानक ओबरा देवी मंदिर परिसर से लापता हो गया. परिवार ने दिन-रात एक करके उसकी तलाश की, लेकिन जब कोई सुराग नहीं मिला, तो थक-हारकर ओबरा थाने में अपहरण की प्राथमिकी (FIR) दर्ज कराई गई.

दिल्ली में रहकर भी नहीं छोड़ी उम्मीद, गया से हुई सुरक्षित बरामदगी

बेटे के गम में टूट चुका परिवार रोजी-रोटी और तलाश की उम्मीद लिए दिल्ली चला गया, लेकिन उन्होंने बेटे को खोजना बंद नहीं किया। इधर औरंगाबाद पुलिस और ओबरा थाने की टीम लगातार सुराग जुटाने में लगी रही. आखिरकार पुलिस की कड़ी मेहनत और गुप्त सूचना के आधार पर गया जिले के डेल्हा थाना क्षेत्र के खरखुरा मोहल्ले में एक गुप्त छापेमारी की गई। इस छापेमारी में पुलिस ने न सिर्फ शिवम को सुरक्षित बरामद किया, बल्कि उसके साथ अगवा किए गए एक अन्य बच्चे ‘आद्विक’ को भी तस्करों के चंगुल से छुड़ा लिया.

थाना परिसर में रो पड़ी मां— “अब तो कहीं नहीं जाओगे ना बाबू…”

जैसे ही पुलिस ने दिल्ली में रह रहे माता-पिता को शिवम के सकुशल मिलने की सूचना दी, वे सब कुछ छोड़कर तुरंत ओबरा थाने पहुंचे। चार साल बाद जब शिवम ने अपनी मां को देखा, तो वह पल भर में उसे पहचान गया और दौड़कर मां के गले से लिपट गया। मां ने अपने कलेजे के टुकड़े को सीने से लगा लिया और बार-बार चूमते हुए रोते-रोते पूछने लगी— “अब तो कहीं नहीं जाओगे ना बाबू…!” माता-पिता की आंखों से बहते खुशी के आंसू देख वहां मौजूद पुलिसकर्मियों और आम लोगों का भी गला भर आया.

पुलिस की तत्परता को सलाम, पूरे क्षेत्र में खुशी की लहर

चार साल के लंबे और कष्टदायी इंतजार के बाद शिवम का सुरक्षित मिलना न केवल इस परिवार के लिए एक नया जीवन मिलने जैसा है, बल्कि पूरे क्षेत्र के लिए राहत और सुकून की खबर है. घटना के बाद शिवम की मां और परिजनों ने ओबरा पुलिस की कार्यशैली, तत्परता और संवेदनशीलता के प्रति हाथ जोड़कर आभार व्यक्त किया. स्थानीय लोगों का कहना है कि यह घटना पुलिस के प्रति जनता के विश्वास को और मजबूत करती है कि “देर है, पर अंधेर नहीं.

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लेखक के बारे में

Published by: Vivek Pandey

विवेक पाण्डेय टीवी चैनल के माध्यम से पिछले 7 सालों से पत्रकारिता में एक्टिव हूं . करियर की शुरुआत Network 10 National News Channel से की. अभी प्रभात खबर डिजिटल बिहार टीम में काम कर रहा हूं. देश और राज्य की राजनीति, कृषि और शिक्षा में रुचि रखता हूं.

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