मां गजेन्द्रेश्वरी देवी मंदिर : आस्था, इतिहास और लोकमान्यताओं का अद्भुत संगम

Aurangabad News: (सौरव कुमार) औरंगाबाद जिले के नवीनगर प्रखंड के कांडी गांव में रामरेखा नदी के तट पर स्थित मां गजेन्द्रेश्वरी देवी मंदिर क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है. प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह प्राचीन मंदिर नवीनगर नगर क्षेत्र से लगभग छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. वर्षों से यहां […]

Aurangabad News: (सौरव कुमार) औरंगाबाद जिले के नवीनगर प्रखंड के कांडी गांव में रामरेखा नदी के तट पर स्थित मां गजेन्द्रेश्वरी देवी मंदिर क्षेत्र की प्रमुख धार्मिक आस्था का केंद्र माना जाता है. प्राकृतिक वातावरण से घिरा यह प्राचीन मंदिर नवीनगर नगर क्षेत्र से लगभग छह किलोमीटर की दूरी पर स्थित है. वर्षों से यहां आसपास के गांवों के श्रद्धालु पूजा-अर्चना के लिए पहुंचते रहे हैं. स्थानीय लोगों की मान्यता है कि यह मंदिर सैकड़ों वर्ष पुराना है और इसकी स्थापना ग्रामीणों के सामूहिक सहयोग से हुई थी. हालांकि मंदिर की स्थापना से जुड़ा कोई लिखित ऐतिहासिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है, लेकिन इसकी प्राचीनता और चमत्कारों को लेकर कई लोककथाएं आज भी ग्रामीणों के बीच प्रचलित हैं.

चनकप गढ़ से जुड़ी है गांव की बसावट

स्थानीय बुजुर्गों के अनुसार वर्तमान नवीनगर क्षेत्र का प्राचीन नाम “चनकप गढ़” था. कहा जाता है कि यहां पहले महास्थान समाज के लोग निवास करते थे. वर्षों पूर्व एक परिवार सुरक्षित एवं ऊंचे स्थान की तलाश में जंगल क्षेत्र होते हुए वर्तमान कांडी गांव के टिला नुमा इलाके में पहुंचा. वहां पहुंचकर परिवार के लोगों ने भगवान गणेश का स्मरण करते हुए “कंडी” गाड़कर बसावट की शुरुआत की. धीरे-धीरे यह स्थान “गणेश कंडी” नाम से प्रसिद्ध हुआ और कालांतर में इसका नाम कांडी गांव पड़ गया.

सोखा बाबा और देवी पिंडी स्थापना की परंपरा

ग्रामीणों के अनुसार गांव बसने के बाद लोगों को अपने कुल देवता की पूजा के लिए बार-बार चनकप गढ़ जाना पड़ता था. दूरी और कठिन रास्ते के कारण ग्रामीणों ने समाधान खोजा. बताया जाता है कि चनकप गढ़ स्थित प्राचीन सोखा बाबा मंदिर परिसर की मिट्टी लाकर कांडी गांव में प्रतिमा स्थापित की गई. इसी क्रम में कुछ दूरी पर देवी पिंडी की स्थापना कर पूजा-अर्चना शुरू हुई. समय बीतने के साथ यह स्थल मां गजेन्द्रेश्वरी देवी मंदिर के रूप में प्रसिद्ध हो गया और आज यह पूरे क्षेत्र की श्रद्धा का केंद्र बना हुआ है.

बाढ़ से रक्षा की लोकमान्यता

मंदिर को लेकर एक प्रसिद्ध लोकमान्यता भी प्रचलित है. ग्रामीण बताते हैं कि कई दशक पहले रामरेखा नदी में भीषण बाढ़ आई थी. गांव पूरी तरह जलमग्न होने की स्थिति में पहुंच गया था और लोगों के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया था. उस समय ग्रामीणों ने मां देवी से गांव की रक्षा की प्रार्थना की. मान्यता है कि इसके बाद बाढ़ का पानी धीरे-धीरे थम गया और गांव सुरक्षित बच गया. तभी से ग्रामीण मां गजेन्द्रेश्वरी देवी को ग्राम देवी के रूप में पूजते हैं और हर शुभ कार्य से पहले मंदिर में मत्था टेकते हैं.

300 वर्ष पुराने पीपल वृक्ष की विशेष मान्यता

मंदिर परिसर में स्थित विशाल पीपल वृक्ष भी श्रद्धालुओं के आकर्षण का केंद्र है. स्थानीय लोग इस वृक्ष को लगभग 300 वर्ष पुराना बताते हैं. मान्यता है कि सोखा बाबा की स्थापना के कई दशक बाद यह पीपल वृक्ष लगाया गया था. आज भी यह वृक्ष मंदिर की प्राचीनता और धार्मिक महत्व का प्रतीक माना जाता है. श्रद्धालु वृक्ष की परिक्रमा कर सुख-समृद्धि की कामना करते हैं.

2023 में हुआ मंदिर का पुनर्स्थापन

समय के साथ पुराना मंदिर जर्जर हो गया था. इसके बाद विक्रम संवत 2060 एवं शक संवत 1945, आषाढ़ कृष्ण नवमी, सोमवार 12 जून 2023 को मंदिर का पुनर्स्थापन कराया गया. वर्तमान में मंदिर मां गजेन्द्रेश्वरी देवी के रूप में प्रतिष्ठित है. यहां प्रतिवर्ष स्थापना दिवस, विशेष पूजा एवं भव्य श्रृंगार कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है, जिसमें बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं.

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लेखक के बारे में

Published by: Vivek Pandey

विवेक रंजन पांडेय का जन्म और पालन-पोषण बिहार के गौरवशाली इतिहास और ज्ञान की भूमि नालंदा में हुआ. इसी पावन धरती के संस्कारों ने उन्हें समाज और व्यवस्था को गहराई से देखने का नजरिया दिया. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को करियर बदलने के लिए उन्होंने पटना के आर्यभट्ट विश्वविद्यालय से पत्रकारिता की डिग्री हासिल की. पिछले 7 वर्षों से टीवी चैनल के जरिए रिपोर्टिंग फील्ड में लगातार सक्रिय हैं. Network 10 National News Channel से करियर की शुरुआत की. उसके बाद कई संस्थानों में काम किया. शिक्षा और राजनीति के साथ कृषि, महिला सुरक्षा से जुड़े मुद्दे पर विशेष रूचि रखते हैं. पत्रकारिता की बारीकियों को सीखा और ग्राउंड जीरो पर रहकर जनता से जुड़े मुद्दों को प्रमुखता से उठाया. वर्तमान में Prabhat Khabar के माध्यम से बिहार की खबरों को एक नया आयाम दे रहे हैं. वे बिहार की राजनीति के साथ-साथ देश की सियासी हलचलों पर भी पैनी नजर रखते हैं. अपने शानदार करियर में उन्होंने ​बिहार के वर्तमान मुख्यमंत्री जब वह उप मुख्यमंत्री थे तब इंटरव्यू किया. इसके साथ कैबिनेट के अधिकांश प्रमुख मंत्रियों का विशेष इंटरव्यू किया है. ​बिहार के शीर्ष नेताओं और नौकरशाहों को बहुत करीब से देखा, समझा और उनकी नीतियों का निष्पक्ष विश्लेषण किया. ​जटिल राजनीतिक घटनाक्रमों को बेहद सरल भाषा में जनता के सामने पेश किया है.

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