Aurangabad News: (औरंगाबाद से सुजीत कमार सिंह) बदलते बिहार और सरकारी शिक्षा व्यवस्था की नई तस्वीर देखनी हो तो शहर के पीएम श्री अनुग्रह मध्य विद्यालय का रुख करना होगा. कभी सामान्य सरकारी विद्यालयों की श्रेणी में गिना जाने वाला यह स्कूल आज अपने अनुशासन, नवाचार, संस्कारयुक्त शिक्षा और आधुनिक शिक्षण पद्धति के कारण निजी विद्यालयों को भी पीछे छोड़ता नजर आ रहा है. विद्यालय में प्रवेश करते ही बच्चों के सामूहिक “गुड मॉर्निंग” और “नमस्ते” की मधुर आवाज हर किसी का ध्यान आकर्षित करती है.
बच्चों के सर्वांगीण विकास पर दिया जाता है जोर
बड़ी बात यह है कि इस विद्यालय के प्रधानाध्यापक उदय कुमार सिंह हैं जो राजकीय शिक्षक का पुरस्कार प्राप्त कर चुके है. प्रधानाध्यापक उदय के नेतृत्व में यह विद्यालय लगातार शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम स्थापित कर रहा है. विद्यालय की गतिविधियां केवल किताबों तक सीमित नहीं हैं, बल्कि बच्चों के सर्वांगीण विकास पर विशेष जोर दिया जा रहा है. यही कारण है कि यह विद्यालय जिले में चर्चा का केंद्र बना हुआ है.
चेतना सत्र बना आकर्षण का केंद्र
सुबह विद्यालय का चेतना सत्र बेहद खास और प्रेरणादायक रहा. इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह थी कि पूरे कार्यक्रम का संचालन बच्चों ने स्वयं किया. छोटे-छोटे बच्चों ने आत्मविश्वास के साथ मंच संभाला और अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन किया. कार्यक्रम की शुरुआत प्रार्थना से हुई, जिसके बाद स्टोरी टेलिंग, “आज का विचार”, सामान्य ज्ञान प्रश्नोत्तरी तथा प्रेरणादायक गतिविधियों का आयोजन किया गया. बच्चों ने पूरे उत्साह और अनुशासन के साथ अपनी प्रस्तुतियां दीं. प्रधानाध्यापक उदय कुमार सिंह ने अपने संबोधन में बच्चों को अनुशासन, समय प्रबंधन, स्वच्छता और सकारात्मक सोच का महत्व बताया उनके संबोधन को बच्चे काफी ध्यानपूर्वक सुनते नजर आए. विद्यालय परिवार का मानना है कि नियमित प्रेरणादायक संवाद बच्चों के व्यक्तित्व विकास में अहम भूमिका निभाता है.
राष्ट्रगान की धुन ने मोह लिया मन
चेतना सत्र का सबसे भावुक और आकर्षक पल तब आया जब नन्हे बच्चों ने केशियो कीबोर्ड, नाल और ढोलक की मदद से राष्ट्रगान और “सारे जहां से अच्छा” की मधुर धुन प्रस्तुत की बच्चों की एकाग्रता और संगीत के प्रति लगाव ने उपस्थित लोगों को मंत्रमुग्ध कर दिया.विद्यालय में कला, संगीत और सांस्कृतिक गतिविधियों को भी शिक्षा का महत्वपूर्ण हिस्सा बनाया गया है. शिक्षकों का कहना है कि इससे बच्चों में आत्मविश्वास बढ़ता है और उनकी रचनात्मक क्षमता विकसित होती है.
शिक्षा में नवाचार से बदल रही तस्वीर
प्रधानाध्यापक उदय कुमार सिंह ने बताया कि बिहार सरकार की शिक्षा के प्रति सक्रियता से शिक्षकों का मनोबल काफी बढ़ा है. विद्यालयों को आधुनिक संसाधनों और विभिन्न शैक्षणिक उपकरणों से सशक्त बनाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि आज सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट शिक्षण, गतिविधि आधारित पढ़ाई और बच्चों की रुचि के अनुरूप शिक्षण पद्धति अपनाई जा रही है. इसी का परिणाम है कि अभिभावकों का भरोसा सरकारी स्कूलों की ओर तेजी से बढ़ रहा है. विद्यालय में बच्चों को केवल परीक्षा तक सीमित शिक्षा नहीं दी जाती, बल्कि व्यवहारिक ज्ञान, संस्कार और नेतृत्व क्षमता विकसित करने पर भी विशेष ध्यान दिया जाता है.
1936 में हुई थी विद्यालय की स्थापना
पीएम श्री अनुग्रह मध्य विद्यालय का इतिहास भी काफी गौरवशाली रहा है. विद्यालय की स्थापना वर्ष 1936 में राष्ट्रपति पुरस्कार प्राप्त शिक्षाविद महेश नारायण सिंह ने की थी.उस दौर में ग्रामीण और सामान्य परिवारों के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से इस विद्यालय की नींव रखी गई थी.समय के साथ यह विद्यालय शिक्षा के क्षेत्र में अपनी अलग पहचान बनाता चला गया.आज भी विद्यालय अपने गौरवशाली इतिहास और शैक्षणिक परंपरा को आगे बढ़ा रहा है.
देश-दुनिया में नाम रोशन कर चुके हैं छात्र
इस विद्यालय से शिक्षा प्राप्त कर चुके कई छात्र आज राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना चुके हैं. विभिन्न क्षेत्रों में यहां के पूर्ववर्ती छात्र बड़े पदों पर कार्यरत हैं और देश का नाम रोशन कर रहे हैं.
विद्यालय प्रबंधन के अनुसार यहां से पढ़े कई छात्र विश्व की नामी कंपनियों में उच्च पदों पर कार्य कर रहे हैं. यही वजह है कि इस विद्यालय को जिले के प्रेरणादायक सरकारी विद्यालयों में गिना जाता है.
सरकारी विद्यालय पेश कर रहे मिसाल
शिक्षकों और विद्यार्थियों की मेहनत, अनुशासन और सकारात्मक वातावरण ने पीएम श्री अनुग्रह मध्य विद्यालय को शिक्षा के क्षेत्र में नई पहचान दिलाई है. यह विद्यालय साबित कर रहा है कि मजबूत नेतृत्व, समर्पित शिक्षक और सकारात्मक सोच हो तो सरकारी विद्यालय भी उत्कृष्टता की मिसाल बन सकते हैं.
