Aurangabad News : जन्माष्टमी महोत्सव : श्रीकृष्ण की बाल लीलाएं सुन मंत्रमुग्ध हुए भक्त

शहर के इस्कॉन मंदिर में दो दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव भव्यता और श्रद्धापूर्ण वातावरण में संपन्न हो गया

औरंगाबाद शहर. शहर के इस्कॉन मंदिर में दो दिवसीय जन्माष्टमी महोत्सव भव्यता और श्रद्धापूर्ण वातावरण में संपन्न हो गया. जन्माष्टमी को लेकर मंदिर परिसर और आसपास का वातावरण श्रीकृष्ण भक्ति से सराबोर हो उठा. रात में भगवान श्रीकृष्ण का महाभिषेक किया गया. इस अभिषेक में 108 प्रकार की दिव्य वस्तुओं जैसे दूध, दही, शहद, घी, फलों के रस, पुष्प जल, गंगाजल आदि का प्रयोग किया गया. भक्तों द्वारा दीप दान भी किया गया. जैसे ही 12 बजे “नंद के घर आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की ” का स्वर गूंज उठा. उसी क्षण हजारों दीपक एक साथ प्रज्वलित हो गये. मंदिर प्रांगण, गलियारे, सीढ़ियां और आंगन सुनहरी ज्योति से नहाने लगे. इसके बाद भगवान को 56 भोग अर्पित किए गए. विशेष आकर्षण के रूप में मंदिर में फूल बंगला सजाया गया, जिसमें विभिन्न रंग-बिरंगे फूलों से भगवान श्रीकृष्ण एवं राधारानी को अलंकृत किया गया. इस अद्भुत झांकी को देखकर भक्त भाव-विभोर हो उठे. मंदिर प्रांगण से लेकर फार्म मोड़, रघुवीर नगर मोड़ से इस्कॉन मंदिर निर्माण क्षेत्र तक पूरे इलाके को रंग-बिरंगी लाइटों से सजाया गया, जिसने रात में उत्सव की शोभा को और भी भव्य बना दिया. कथा का वाचन अभय अच्युत प्रभु ने किया. उन्होंने भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं जैसे माखन चोरी, कालिया नाग पर नृत्य और गोवर्धन धारण की कथा सुनाकर भक्तों को मंत्रमुग्ध कर दिया. कथा के अंत में गीता के संदेशों को आधुनिक जीवन में अपनाने पर भी विशेष प्रकाश डाला गया.

मटकी फोड़ प्रतियोगिता का उत्साह

मंदिर प्रांगण में आयोजित मटकी फोड़ प्रतियोगिता विशेष आकर्षण का केंद्र रही. ऊंचाई पर लटकी दही-हांडी को फोड़ने के लिए युवाओं की टोली ने मानो श्रीकृष्ण की गोप टोली की याद दिला दी. जय कन्हैया लाल की के उद्घोष से वातावरण गूंज उठा. इस प्रतियोगिता में कई प्रतिभागियों ने भाग लिया.

भंडारे के साथ जन्माष्टमी संपन्न

भंडारे के साथ दो दिवसीय जन्माष्टमी का समापन हुआ. भंडारे में लगभग पांच हजार श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया. दोनों ही दिनों में भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए प्रशासन द्वारा सुरक्षा और व्यवस्थाओं पर विशेष ध्यान दिया गया. पुलिस बल मंदिर एवं पंडाल के चारों ओर तैनात रहे ताकि किसी भी प्रकार की अव्यवस्था न हो. मंदिर के स्वयंसेवकों ने सेवाभाव से भीड़ को व्यवस्थित किया और प्रसाद वितरण के दौरान अनुशासन बनाए रखा.

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