Aurangabad News : अलर्ट! टीबी संक्रमण के हाई रिस्क जोन में जिले के 463 गांव
Aurangabad News: उच्च जोखिम श्रेणी में शामिल गांवों में स्क्रीनिंग अभियान तेज
औरंगाबाद सदर. टीबी उन्मूलन के लक्ष्य को हासिल करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है. जिले में 100 दिवसीय टीबी स्क्रीनिंग अभियान के तहत व्यापक स्तर पर टीबी जागरूकता सह जांच कार्यक्रम संचालित किया गया है. इस अभियान का उद्देश्य टीबी मरीजों की पहचान करने, उनके उपचार सुनिश्चित कराने सहित संक्रमण के प्रसार को रोकना है. टीबी जांच के लिए उन क्षेत्रों को प्राथमिकता दी गयी है जहां टीबी के संक्रमण का खतरा अधिक है. जिले के 463 गांवों को टीबी संक्रमण के उच्च जोखिम की श्रेणी में रखा गया है. इन गांवों में विशेषतौर पर टीबी सक्रीनिंग सह जागरूकता कार्यक्रम चलाया जा रहा है.
जांच में नयी तकनीक का इस्तेमाल
टीबी नोडल अफसर डॉ रविरंजन ने बताया कि टीबी की समय पर पहचान करने के लिए आधुनिक तकनीकों की मदद ली जा रही है. इसमें पोर्टबल हैंडहेल्ड एक्सरे मशीन शामिल है. इससे दुर्गम और ग्रामीण क्षेत्रों में आसानी से जांच संभव हो सकेगा. इसके अलावा स्वास्थ्य केंद्रों पर भी एक्सरे की सुविधा मौजूद है. चेस्ट एक्सरे के बाद बलगम जांच भी करायी जा रही है.
463 गांवों संक्रमण का खतरा अधिक
जिला के 463 गांवों में टीबी संक्रमण का खतरा सबसे अधिक है. रफीगंज प्रखंड के 60 गांव, ओबरा के 57 गांव, नवीनगर के 33 गांव, मदनपुर के 37 गांव, कुटुंबा के 13 गांव, हसपुरा के 41 गांव, गोह के 52 गांव, देव के 22 गांव, दाउदनगर के 30 गांव, बारुण के 64 गांव व सदर प्रखंड के 54 गांव उच्च जोखिम वाले श्रेणी में शामिल हैं. इन गांवों में जागरूकता अभियान चलाकर टीबी की जांच कराने के लिए प्रेरित किया जा रहा है.
1300 से अधिक टीबी मरीज चिह्नित
नेशनल ट्यूबरक्लोसिस एलिमिनेशन प्रोग्राम के प्रोग्राम कॉर्डिनेटर अजीत कुमार शर्मा ने बताया कि टीबी के संभावित मरीज की पहले एक्सरे कराया जाता है. इसके बाद बलगम की जांच की जाती है. बताया कि 1300 से अधिक टीबी के मरीजों को चिह्नित किया गया है. इनके उपचार की प्रक्रिया प्रारंभ कर दी गयी है. टीबी के मरीज को छह माह तक दवा का सेवन करना आवश्यक है.
उच्च जोखिम वाले पर विशेष नजर
100 दिवसीय टीबी स्क्रीनिंग अभियान के दौरान उन लोगों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, जिनमें संक्रमण का खतरा अधिक है. इसमें पिछले दो वर्षों में टीबी का इलाज करा चुके मरीज, उनके परिजन, एचआइवी, कैंसर और किडनी के मरीज शामिल हैं. साथ ही जेलों, स्लम एरिया, ईंट भट्टा, निर्माण स्थल, सीमेंट कारखाना में कार्यरत मजदूर, कुपोषित बच्चे, बुजुर्ग और धूम्रपान करने वालों की जांच जरूरी तौर पर की जा रही है.