प्रशिक्षण में शामिल बंदी

औरंगाबाद के जेल में बंद 35 बंदियों के लिए खुला कमाई का रास्ता, छह दिन की ट्रेनिंग में क्या-क्या सीखेंगे?

औरंगाबाद मंडल कारा में बंदियों को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल शुरू हुई है. छह दिवसीय उद्यमिता विकास कार्यक्रम के तहत 35 बंदियों को स्वरोजगार के गुर सिखाए जाएंगे. इसका उद्देश्य रिहाई के बाद उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़कर सम्मानजनक जीवन जीना सिखाना है.

Self-Employment Aurangabad: मंडल कारा, औरंगाबाद में बंदियों को आत्मनिर्भर और स्वरोजगार के लिए प्रेरित करने की दिशा में मंगलवार को महत्वपूर्ण पहल की गयी. मंडल कारा परिसर में छह दिवसीय सामान्य उद्यमिता विकास कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया. कार्यक्रम का उद्घाटन जेल अधीक्षक डॉ. दीपक कुमार एवं पंजाब नेशनल बैंक ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान (आरसेटी), औरंगाबाद के निदेशक राजकुमार सिंह ने संयुक्त रूप से किया.

इस कार्यक्रम के तहत मंडल कारा के 35 बंदियों को उद्यमिता एवं स्वरोजगार से संबंधित विशेष प्रशिक्षण दिया जाएगा. प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य बंदियों के भीतर आत्मविश्वास, कौशल और स्वावलंबन की भावना विकसित करना है, ताकि रिहाई के बाद वे समाज की मुख्यधारा से जुड़कर सम्मानजनक एवं आत्मनिर्भर जीवन जी सकें.

छह दिनों तक मिलेगा उद्यमिता का प्रशिक्षण

छह दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम के दौरान बंदियों को व्यवसाय के सही चयन, उद्यम स्थापित करने की प्रक्रिया, वित्तीय प्रबंधन, बाजार की समझ और स्वरोजगार के विभिन्न अवसरों की जानकारी दी जाएगी. इसके साथ ही छोटे व्यवसाय शुरू करने के लिए आवश्यक योजना, प्रबंधन और संचालन से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में भी प्रशिक्षित किया जाएगा.

प्रशिक्षण के दौरान अभिजीत कुमार सिंह, डोमेन स्किल ट्रेनर एवं कृषि विशेषज्ञ, बंदियों को विशेष रूप से मार्गदर्शन देंगे. वहीं रामरूप कुमार एवं रामनंदन कुमार फैकल्टी के रूप में प्रशिक्षण प्रदान करेंगे.

जेल केवल सजा की जगह नहीं, बदलाव का अवसर : अधीक्षक

इस अवसर पर जेल अधीक्षक डॉ. दीपक कुमार ने कहा कि कारा केवल दंड का स्थान नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक बदलाव लाने का भी एक अवसर है. इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रम बंदियों में आत्मविश्वास और स्वावलंबन की भावना पैदा करेंगे. रिहाई के बाद उन्हें अपने पैरों पर खड़ा होने और सम्मानजनक जीवन जीने में भी मदद मिलेगी.

उन्होंने कहा कि बंदियों को कौशल और रोजगार से जोड़ना उनके पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है. इससे उन्हें समाज की मुख्यधारा में लौटने के बाद आत्मनिर्भर बनने का अवसर मिलेगा.

बंदियों के पुनर्वास की दिशा में महत्वपूर्ण पहल

कार्यक्रम के अंत में उपाधीक्षक सरोज कुमार ने धन्यवाद ज्ञापन किया. कार्यक्रम का आयोजन सहायक अधीक्षक सह बंदी कल्याण पदाधिकारी संजीव कुमार की देखरेख में किया जा रहा है.

मंडल कारा प्रशासन की इस पहल को बंदियों के पुनर्वास और उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. उद्यमिता एवं स्वरोजगार का प्रशिक्षण मिलने से बंदियों को रिहाई के बाद रोजगार के अवसर तलाशने और छोटे व्यवसाय शुरू करने में मदद मिलने की उम्मीद है.

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लेखक के बारे में

By सुजीत कुमार सिंह

सुजीत कुमार सिंह पिछले 15 वर्षों से पत्रकारिता के क्षेत्र में सक्रिय हैं. क्राइम की खबरों की गहरी समझ है. वर्ष 2014 से प्रभात खबर औरंगाबाद में ब्यूरो चीफ की जिम्मेवारी संभाल रहे हैं. सच्चिदानंद सिन्हा कॉलेज, औरंगाबाद से ग्रेजुएशन की पढ़ाई पूरी की.

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