Aurangabad News: मोहर्रम के चेहलुम पर्व पर मंगलवार को औरंगाबाद शहर में निकले जुलूस ने सांप्रदायिक सौहार्द, राष्ट्रीय एकता और गंगा-जमुनी तहजीब की अनूठी मिसाल पेश की. जुलूस में मुस्लिम समुदाय के लोगों ने पारंपरिक इस्लामिक ध्वजों के साथ-साथ हाथों में तिरंगा भी लहराया.
शहर के कई युवाओं के हाथों में ऐसी तख्तियां थीं, जिन पर 'सारे जहां से अच्छा हिंदोस्तां हमारा', 'हम बुलबुलें हैं इसकी, यह गुलिस्तां हमारा', 'हिंदुस्तान जिंदाबाद' और 'हिंदू-मुस्लिम एकता जिंदाबाद' जैसे भाईचारे के संदेश लिखे हुए थे.
'या हुसैन' के जयकारों के साथ गूंजा पूरा शहर
जुलूस के दौरान अकीदतमंद 'या हुसैन' और 'या अली' के जयकारे लगाते हुए कर्बला के शहीदों की शहादत को याद कर रहे थे. इसके साथ ही राष्ट्रीय एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश भी दिया जा रहा था. बड़ी संख्या में आम नागरिकों और युवाओं ने तिरंगा थामकर देश की अखंडता और आपसी भाईचारे के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई.
प्रशासन रहा मुस्तैद, अधिकारियों ने की निगरानी
शांतिपूर्ण और सुरक्षित आयोजन को लेकर जिला प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड में रहा. जिलाधिकारी अभिलाषा शर्मा, पुलिस अधीक्षक उपेंद्र नाथ वर्मा, सदर एसडीओ गौरव सिंह, एसडीपीओ सुशील कुमार, नगर थानाध्यक्ष बबन बैठा तथा नगर अंचल पुलिस निरीक्षक फहीम आजाद खान समेत कई वरिष्ठ अधिकारी जुलूस मार्ग पर लगातार मुस्तैद रहे.
प्रशासकीय अधिकारियों ने शांतिपूर्ण माहौल पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि औरंगाबाद की पहचान हमेशा से गंगा-जमुनी तहजीब और सामाजिक सद्भाव के लिए रही है.
"हजरत इमाम हुसैन का जीवन सत्य और इंसानियत का प्रतीक": सल्लू खान
जुलूस में शामिल 'पैगाम-ए-इंसानियत' के जिलाध्यक्ष सह समाजसेवी मो. शाहनवाज रहमान उर्फ सल्लू खान ने कहा कि हजरत इमाम हुसैन का संपूर्ण जीवन सत्य, न्याय, अमन और इंसानियत की रक्षा का महान प्रतीक है. उन्होंने कहा कि चेहलुम का यह अवसर अन्याय के खिलाफ डटकर खड़े होने, मानवता की निस्वार्थ सेवा करने और समाज में आपसी प्रेम व भाईचारे का संदेश फैलाने का दिन है.
