Aurangabad News: औरंगाबाद सदर अस्पताल में कैंसर स्क्रीनिंग के दौरान चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं. अस्पताल के गैर-संचारी रोग (एनसीडी) विभाग में जनवरी 2026 से 22 जुलाई 2026 तक कुल 12 हजार 972 लोगों की कैंसर स्क्रीनिंग की गयी. जांच के दौरान अब तक 38 लोगों में कैंसर की पुष्टि हुई है. इनमें मुंह के कैंसर के 24, ब्रेस्ट कैंसर के चार और यूट्रस कैंसर के 10 मरीज शामिल हैं. सभी मरीजों को बेहतर इलाज के लिए हायर सेंटर रेफर किया गया है.
सात महीने में हुई 628 पुरुष और 344 महिलाओं की स्क्रीनिंग
एनसीडी विभाग के चिकित्सक डॉ. अजितेश कुमार ने बताया कि सात माह के दौरान सात हजार 628 पुरुषों और पांच हजार 344 महिलाओं की स्क्रीनिंग की गयी. स्क्रीनिंग के दौरान सामने आये आंकड़े इस बात की ओर इशारा कर रहे हैं कि जिले में कैंसर के मामलों को लेकर लोगों को और अधिक जागरूक होने की जरूरत है. खासकर मुंह, ब्रेस्ट और यूट्रस कैंसर के मामलों की पहचान स्क्रीनिंग के माध्यम से हो रही है.
महज दो माह में 10 मरीजों की पहचान
डॉ अजितेश कुमार ने बताया कि जून और जुलाई माह में ही 10 नये कैंसर मरीजों की पहचान हुई है. जून में छह मरीज मिले, जिनमें मुंह के कैंसर के चार और ब्रेस्ट कैंसर के दो मरीज शामिल हैं. वहीं जुलाई माह में अब तक चार नये मरीजों की पहचान की जा चुकी है. इनमें मुंह के कैंसर का एक, ब्रेस्ट कैंसर के दो और यूट्रस कैंसर का एक मरीज शामिल है. इस तरह महज करीब दो माह में 10 मरीजों की पहचान हुई है.
बिहार के टॉप-5 केंद्रों में शामिल है एनसीडी विभाग
डॉ अजितेश ने बताया कि सदर अस्पताल का एनसीडी विभाग कैंसर स्क्रीनिंग के क्षेत्र में बिहार के टॉप-5 केंद्रों में शामिल है. यहां लगातार लोगों की स्क्रीनिंग की जा रही है, ताकि कैंसर की पहचान शुरुआती चरण में ही की जा सके. उन्होंने बताया कि अब सदर अस्पताल में बायोप्सी जांच की सुविधा भी उपलब्ध हो गयी है. इससे संदिग्ध मरीजों की जांच में काफी सहूलियत होगी. आने वाले समय में अस्पताल में कीमोथेरेपी की सुविधा शुरू करने की भी तैयारी है.
शरीर में गांठ दिखे तो तुरंत कराएं जांच
चिकित्सक ने लोगों से अपील की है कि शरीर में कहीं भी गांठ हो, मुंह में लंबे समय तक घाव रहे, मुंह खोलने में परेशानी हो, ब्रेस्ट में गांठ या दर्द हो अथवा महिलाओं में असामान्य लक्षण दिखाई दें तो इसे नजरअंदाज नहीं करें. ऐसे लक्षण दिखने पर तुरंत सदर अस्पताल पहुंचकर जांच करानी चाहिए. उन्होंने कहा कि कैंसर का समय पर पता चलने और इलाज शुरू होने से मरीज की जान बचायी जा सकती है. शुरुआती चरण में कैंसर की पहचान होने पर इलाज के बेहतर परिणाम मिलते हैं.
