चरखे के नये मॉडल ने बदली तसवीर

सुधीर कुमार सिन्हा – जिले में खादी के धागों पर टिकी है हजारों परिवारों की रोजी-रोटी – वित्तीय वर्ष में तीन करोड़ 75 लाख रुपये के वस्त्रों के उत्पादन का लक्ष्य औरंगाबाद : खादी के महीन धागों पर जिले के तीन हजार से ज्यादा परिवारों की जिंदगी टिकी है. इसी महीन धागे से हजारों परिवार […]

सुधीर कुमार सिन्हा

– जिले में खादी के धागों पर टिकी है हजारों परिवारों की रोजी-रोटी

– वित्तीय वर्ष में तीन करोड़ 75 लाख रुपये के वस्त्रों के उत्पादन का लक्ष्य

औरंगाबाद : खादी के महीन धागों पर जिले के तीन हजार से ज्यादा परिवारों की जिंदगी टिकी है. इसी महीन धागे से हजारों परिवार अपनी किस्मत बुनने में लगे हैं. इनके बदौलत ही करोड़ों रुपये का उत्पादन लक्ष्य भी हासिल किया जा रहा है. इस उत्पादन की शत प्रतिशत लक्ष्य की प्राप्ति असंगठित क्षेत्र की बनुकरों की ही देन है. जो परंपरा गत चरखे के साथ त्रिपुरारी मॉडल चरखा का उपयोग कर रहे हैं.

खादी की इसी कताई बुनाई से इन हजारों परिवार अपनी जीविका चला रहे है. जिला खादी ग्रामोद्योग समिति के जिला प्रबंधक अजय कुमार श्रीवास्तव बताते है कि अभी फरवरी माह के अंत तक लगभग ढ़ाई करोड़ रुपये वस्त्रों का उत्पादन यानी की लक्ष्य का एक बड़ा भाग उत्पादित कर लिया गया है. पिछले साल जिले ने बड़ी सहजता से ढ़ाई करोड़ का लक्ष्य हासिल कर लिया था.

इस वित्तीय वर्ष में कुल तीन करोड़ 75 लाख रुपये के वस्त्र उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें एक करोड़ 10 लाख की सूती कपड़े, एक करोड़ 50 लाख के ऊनी कंबल, 50 लाख के ऊनी कपड़े, 30 लाख के पोली कपड़े एवं अन्य राशि से सूत उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है,जिसे पिछले साल की तरह ही इस साल भी समय रहते ही पूरा कर लिया जायेगा. जिला प्रबंधक के अनुसार हाल के वर्षो में यह जिला खादी का प्रमुख उत्पादक केंद्र के रूप में उभरा है. साथ ही यहां खादी व ग्राम उत्पादों की मांग भी बढ़ती जा रही है.

प्रभात खबर डिजिटल प्रीमियम स्टोरी

लेखक के बारे में

यह प्रभात खबर का डिजिटल न्यूज डेस्क है। इसमें प्रभात खबर के डिजिटल टीम के साथियों की रूटीन खबरें प्रकाशित होती हैं।

Read More

संबंधित खबरें >

यह भी पढ़ें >