अस्पताल के जनरल वार्ड, महिला ओपीडी, प्रसूता वार्ड, कैदी वार्ड में जाकर बदले मरीजों के पुराने नोट
औरंगाबाद सदर : रुपये रहते आर्थिक तंगी की मार झेल रहे मरीजों को डाककर्मियों ने राहत पहुंचाने का काम किया है.
शुक्रवार की दोपहर डाक विभाग के अधीक्षक विभूतिशरण पाठक के नेतृत्व में डाककर्मियों की एक टीम अस्पताल पहुंची और विभिन्न वार्डो में भरती मरीजों के बीच जाकर उनके पुराने नोटों को बदलते हुए एक सौ व दस रुपये के खुदरा नोट बांटे. अस्पताल में बीमार भरती मरीजों के चेहरे पर खुशी देखने को मिली. कुछ मरीजों ने रुपये बदलने के क्रम में अपनी असमर्थता जाहिर करते हुए बताया कि साहब कोई सहारा नहीं होने के कारण नोटों को बदलने मे बड़ी परेशानी हो रही थी. अस्पताल की दवा दुकानों पर भी दवाएं नहीं मिल रही थीं. हर जगह से पुराने नोट वापस कर दिये जा रहे थे. दवा के अलावे खाने-पीने का सामान भी नहीं खरीद पा रहे थे. ऐसे में जब मरीजों को उनके पुराने नोटों के बदले खुले रुपये उनके हाथों में दिये गये, तो उनके चेहरे खुशी से चमक उठे. इस बीच बहुत सारे मरीज अस्पताल में ऐसे मिले, जिनके साथ न तो उनके परिजन थे और न तो इस शहर में उन्हें कोई जाननेवाला. बस उनके जेब में पांच सौ व हजार के नोट पड़े थे, लेकिन वे रुपये रहते हुए भी जीवनरक्षक दवाओं को खरीदने से असमर्थ थे.
डाक कर्मियों ने अस्पताल के जनरल वार्ड, महिला ओपीडी, प्रसूति वार्ड, कैदी वार्ड में जाकर मरीजों के पुराने नोट बदले. इस दौरान अस्पताल में भरती बालूगंज थाने में पदस्थापित सीआरपीएफ जवान एसआर महतो, आरा निवासी ब्रजेश कुमार, ज्ञान मनोहर, सीता देवी, धर्मेंद्र राम, कमलेश कुमार पांडेय, धर्मेंद्र यादव सहित दर्जनों मरीजों के नोट बदले गये. इस दौरान उपस्थित पोस्टमास्टर लखन प्रसाद ने बताया कि अस्पताल में भरती मरीज न तो बैंक तक पहुंच पा रहे थे और न ही पोस्टऑफिस तक ही नोट बदलने आ रहे थे. ऐसे में डाक अधीक्षक ने यह निर्णय लिया कि मरीजों के रुपये अस्पताल में ही जाकर बदले जायें, ताकि उन्हें इलाज में मदद मिल सके. उन्होंने कहा कि इससे मरीजों को काफी लाभ पहुंचा है. इस दौरान डाक निरीक्षक प्रियरंजन कुमार, विकास कुमार, डाककर्मी सफकर इजहार मुख्य रूप से उपस्थित थे.
