औरंगाबाद (ग्रामीण) : लगभग तीन वर्ष का प्रेम शादी के बंधन में बंधने के पूर्व अगर टूटती हुई दिखाई पड़े तो उसे संवारने के लिए पहल जरूरी है. वैसे सामाजिक बंधनों के साथ-साथ रिश्तेदारी भी देखना बेहद जरूरी है. पहले रिश्तेदारी में आने-जाने के दौरान जान पहचान हुई, फिर पहचान प्रेम में बदल गयी. स्कूल से कॉलेज तक प्रेम का लुकाछिपी होते रहा. लेकिन, जब प्रेम को शादी के बंधन में बांधने की तैयारी हुई तो दूल्हा ही पीछे हटने लगा. ऐसे में प्रेमिका कैसे बरदाश्त करती.
लोक लज्जा को त्याग कर मजबूत इरादे के साथ थाने पहुंची और तीन साल के प्रेम इतिहास के हर पन्ने को पलट दिया, फिर क्या था. प्रेमिका की गुहार पर पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए प्रेमी और उसके परिवार को थाने में पहुंचने का फरमान जारी किया. थाने में ही प्रेमी और प्रेमिका पक्ष के लोग एक साथ बैठे. घंटों बात हुई और फिर मामला शादी पर समाप्त हो गया. सोमवार की दोपहर प्रेमी शिवराज कुमार और प्रेमिका रजंती कुमारी निबंधन कार्यालय में शादी का निबंधन कराने के बाद सात जन्मों के लिए शादी के बंधन में बंध गये.
इस शादी का साक्षी भगवान के साथ-साथ दर्जनों बराती बने जो दोनों तरफ से पहुंचे थे. यह मामला कुटुंबा थाने से संबंधित है. दुल्हन बनी रजंती कुमारी दधपा पंचायत के बरहेता गांव निवासी लालमुनी राम की पुत्री है, जबकि दूल्हा बना शिवराज कुमार सदर प्रखंड के पोखराहा गांव का रहनेवाला है. मिली जानकारी के अनुसार, शिवराज का ममहारा बरहेता गांव में है. आने-जाने के दौरान रिश्ते में मौसी लगने वाली रजंती से उसकी आंखे लड़ गयी. धीरे-धीरे दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा.
साथ जीने मरने की कसमें भी दोनों ने खायी. लेकिन, जब लड़की ने शादी का दबाव बनाया तो लड़का मुकरने लगा. शनिवार की रात आठ बजे रजंती अपनी फरियाद लेकर कुटुंबा थाना पहुंची और थानाध्यक्ष सुभाष राय को सारे मामले की जानकारी दी. थानाध्यक्ष ने शिवराज व उसके परिजनों को थाने बुलाया. काफी देर तक दोनों पक्षों को समझाया बुझाया गया, तब जाकर मामला शादी तक पहुंचा. सोमवार को शादी की तारीख मुकर्रर की गयी.
दधपा पंचायत के पूर्व मुखिया संजय कुमार सिंह, समाजसेवी गुंजन मेहता भी पहुंचे और शादी के गवाह बने. कुटुंबा थानाध्यक्ष सुभाष राय ने बताया कि आपसी सहमति के बाद दोनों की शादी करायी गयी है. दुल्हन पक्ष से पिता लालमुनी राम व मां के साथ अन्य परिजन तो दूल्हा पक्ष से दूल्हे का भाई राजू कुमार, चाचा सरयू राम आदि मौजूद थे.
