औरंगाबाद (नगर) : आज सभी लोगों में कोई न कोई बीमारी जरूर पायी जा रही है. सौ बीमारियों की एकमात्र इलाज है आयुर्वेदिक दवा, जो आज होमियाेपैथ के नाम से भी प्रसिद्ध है. आयुर्वेदिक दवा यूनानी पद्धति से बना है, जो पुराने नुख्शे के साथ आज भी असरदार साबित हो रही है. उक्त बातें आयुष चिकित्सक संघ के मीडिया प्रभारी डाॅ एमके शमी ने सोमवार को आयोजित दशा व दिशा पर परिचर्चा के दौरान कहीं.
डॉ शमी ने कहा कि रोग-बीमारी से मुक्त रहने के लिए पांच विधाओं से बना आयुष यानी आयुर्वेदिक दवा को अपनाना जरूरी है.
वर्षों पहले लोग आयुर्वेदिक दवाओं का प्रयोग करते थे और बिल्कुल स्वस्थ रहते थे. आज लोगों में कई बीमारियों के लक्षण पाये जा रहे हैं, लेकिन इन दवाओं के अभाव में वे और गंभीर रूप से बीमार होते दिख रहे हैं. उन्होंने कहा कि शताब्दी पहले से बनी अनेकों चिकित्सीय शास्त्र जल गये या फिर नष्ट हो गये, पर यूनानी आयुर्वेदिक शास्त्र आज भी अपनी महत्ता को बरकरार रखे हुए हैं, जो गर्व की बात है. इस आयुर्वेदिक दवाओं को मुख्यधारा में लाने का प्रयास किया जा रहा है. आयुष चिकित्सों द्वारा औरंगाबाद जिले के शहरी से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों को इसका लाभ दिया जा रहा है.
प्रेसवार्ता के दौरान अन्य चिकित्सकों ने कहा कि जिले के अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से आयुष चिकित्सक ग्रामीणों को लाभ दे रहे हैं. आयुर्वेद दवाओं आगे बढ़ाने के लिए केंद्र व राज्य सरकार भी संकल्पित है. वैसे विभिन्न कार्यक्रमों के माध्यम से इसका प्रचार-प्रसार किया जा रहा है.
चिकित्सकों ने कहा कि प्रत्येक माह जिला स्वास्थ्य समिति की ओर से मेगा चिकित्सा कैंप लगाना चाहिए. इस मौके पर डाॅ सुनील मिश्रा, डाॅ अवधेश मिश्रा, डाॅ राधेकृष्ण तिवारी, डाॅॅ गंगासागर सिंह, डाॅ दिलीप कुमार, डाॅ सरमद आलम, डाॅ राजीव रंजन व डाॅ नंदनी आदि उपस्थित थे.
