औरंगाबाद कार्यालय. निजी विद्यालयों में री-एडमिशन के नाम पर अभिभावकों से मनमानी वसूली, किताब और ड्रेस एक ही दुकान से खरीदने के दबाव के खिलाफ कुटुंबा के विधायक ललन भुइंया ने कड़ा रुख अपनाया है. उन्होंने स्पष्ट कहा कि शिक्षा के नाम पर आर्थिक शोषण किसी कीमत पर बर्दाश्त नहीं किया जायेगा. अगर यह व्यवस्था नहीं सुधरी तो जनता के साथ सड़क पर उतरकर आंदोलन किया जायेगा. विधायक ने कहा कि कई निजी विद्यालय शिक्षा के मंदिर कम और व्यवसायिक केंद्र अधिक बनते जा रहे है. मध्यमवर्गीय परिवारों पर री-एडमिशन फीस, किताब, ड्रेस और अन्य मदों के नाम पर अनावश्यक आर्थिक बोझ डाला जा रहा है. उन्होंने आरोप लगाया कि स्कूल प्रबंधन अभिभावकों को निर्धारित दुकानों से ही सामग्री खरीदने के लिए बाध्य कर रहा है, जो नियमों के विरुद्ध है. ललन भुइंया ने कहा कि इस तरह की मनमानी पर सरकार को सख्त कार्रवाई करनी चाहिए. उन्होंने हाल में डीएम द्वारा री-एडमिशन और फीस वसूली पर जारी दिशा-निर्देशों की सराहना करते हुए कहा कि इनका कड़ाई से पालन होना चाहिए. यदि निजी विद्यालय आदेशों की अनदेखी करते हैं तो कुटुंबा विधानसभा क्षेत्र से आंदोलन की शुरुआत की जायेगी.
एक देश, एक एजुकेशन नीति की उठायी मांग
विधायक ने शिक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की जरूरत बताते हुए ‘एक देश, एक एजुकेशन नीति’ लागू करने की मांग उठायी. उन्होंने कहा कि पूरे देश में समान शिक्षा व्यवस्था लागू होने से सरकारी और निजी विद्यालयों के बीच असमानता खत्म होगी. उन्होंने यह भी कहा कि बिहार सरकार इस दिशा में गंभीर है और प्रयास किया जा रहा है कि जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों के बच्चे सरकारी स्कूलों में पढ़ें, जिससे सरकारी शिक्षा व्यवस्था और मजबूत होगी.
स्वास्थ्य क्षेत्र में भी उठाया दोहन का मुद्दा
विधायक ने स्वास्थ्य क्षेत्र में भी कथित आर्थिक शोषण पर चिंता जतायी. उन्होंने कहा कि मरीजों को 50 रुपये की दवा 500 रुपये तक में बेचे जाने की शिकायतें गंभीर हैं. इस पर प्रशासन को कार्रवाई करनी चाहिए ताकि गरीब और जरूरतमंद मरीजों को राहत मिल सके.मंत्रिमंडल विस्तार में औरंगाबाद को प्रतिनिधित्व की मांग
मंत्रिमंडल विस्तार को लेकर चल रही चर्चाओं के बीच विधायक ललन भुइया ने कहा कि उनकी पार्टी को कम से कम दो मंत्री पद मिलना चाहिए. उन्होंने कहा कि औरंगाबाद जिला लंबे समय से मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व से वंचित है, जो दुर्भाग्यपूर्ण है. इस बार जिले को उचित भागीदारी मिलनी चाहिए. उन्होंने कहा कि जिलाध्यक्ष रणधीर सिंह के नेतृत्व में पार्टी का जनाधार मजबूत हुआ है और कार्यकर्ताओं ने लगातार मेहनत की है. ऐसे में शीर्ष नेतृत्व को जिले के योगदान का सम्मान करते हुए मंत्रिमंडल में औरंगाबाद को स्थान देना चाहिए. प्रेसवार्ता में हम के जिलाध्यक्ष रंधीर सिंह, पूर्व जिलाध्यक्ष हरेंद्र सिंह, युवा अध्यक्ष राहुल सिंह आदि मौजूद थे.
