छात्रावास का खटकता है अभाव

दाउदनगर (अनुमंडल) : रकारी स्तर पर छात्राओं के उच्च स्तरीय शिक्षा के अभाव को देखते हुए 1983 में स्थानीय शिक्षाविदों द्वारा दाउदनगर में महिला महाविद्यालय की स्थापना की गयी थी. सरकार द्वारा प्रस्वीकृत यह महाविद्यालय छात्राओं के बीच शैक्षणिक प्रसार में सफल भी साबित हो रहा है. इसका सार्थक परिणाम यह है कि यहां दाउदनगर […]

दाउदनगर (अनुमंडल) : रकारी स्तर पर छात्राओं के उच्च स्तरीय शिक्षा के अभाव को देखते हुए 1983 में स्थानीय शिक्षाविदों द्वारा दाउदनगर में महिला महाविद्यालय की स्थापना की गयी थी. सरकार द्वारा प्रस्वीकृत यह महाविद्यालय छात्राओं के बीच शैक्षणिक प्रसार में सफल भी साबित हो रहा है.
इसका सार्थक परिणाम यह है कि यहां दाउदनगर के अलावे ओबरा, गोह, हसपुरा व समीपवर्ती अरवल जिले के कलेर व मेहंदिया के सुदूरवर्ती ग्रामीण क्षेत्रों से छात्रएं पढ़ाई करने आती है. उनके आवागमन का एकमात्र साधन यात्री वाहन है.
प्रबंधन के अनुसार लगभग छह हजार छात्राओं का यहां नामांकन है. 30 कमरे हैं, जिनमें लगभग 800 से 1000 तक नियमित उपस्थिति नियमित पढ़ाई के कारण होती है. यह सुन कर आश्चर्य होता है कि बिना किसी सरकारी सहायता के छात्राओं से वसूली गयी विकास राशि से ही कॉलेज में सारे संसाधन मौजूद है. पुस्तकालय, कंप्यूटर, प्रयोगशाला, खेल-संसाधन उपलब्ध है. समय-समय पर जनप्रतिनिधियों द्वारा भी अपने कोष से संसाधन उपलब्ध कराया गया है. 40 शिक्षक व 60 शिक्षकेतर कर्मचारी कार्यरत हैं. इतना सब कुछ होते हुए भी छात्रावास का अभाव खटक रहा है. महाविद्यालय सूत्रों का कहना है कि यदि छात्राओं के लिए छात्रावास की व्यवस्था हो जाये तो नियमित उपस्थिति में बढ़ोतरी होगी.

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