अब एक क्लिक में मिलेगी अपराधियों की कुंडली

औरंगाबाद शहर : जिले के सभी थाने, न्यायालय और जेल ऑनलाइन किये जा रहे हैं. इसके तहत एक प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगे. इसके लिए सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल्स ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) लागू किया जा रहा है. यह एक तरह की ऑनलाइन व्यवस्था है. इस नयी व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया तेजी से पूरी की […]

औरंगाबाद शहर : जिले के सभी थाने, न्यायालय और जेल ऑनलाइन किये जा रहे हैं. इसके तहत एक प्लेटफॉर्म से जुड़ेंगे. इसके लिए सीसीटीएनएस (क्राइम एंड क्रिमिनल्स ट्रैकिंग नेटवर्क एंड सिस्टम) लागू किया जा रहा है. यह एक तरह की ऑनलाइन व्यवस्था है. इस नयी व्यवस्था को लागू करने की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जा रही है. सीसीटीएनएस लागू होने के बाद एक क्लिक पर थानों में दर्ज केस व अपराधियों की जानकारी मिल जायेगी.

अब तक ऐसा देखा जाता है कि न्यायालय में जरूरत पड़ने पर किसी केस या अपराधियों से संबंधित रिपोर्ट थाने से मंगायी जाती है. इससे केस के निष्पादन में विलंब भी होता है. वहीं दूसरी ओर, थानों में दर्ज मामलों की स्थिति क्या है, इसकी जानकारी पुलिस के वरीय पदाधिकारियों को बिना अवगत हुए नहीं हो पाती है.
इसी को देखते हुए अब सीसीटीएनएस व्यवस्था लागू की जा रही है. इसके मुताबिक पुलिस अधिकारियों व जवानों को तैयार भी किया जायेगा. यानी इससे संबंधित प्रशिक्षण भी दिया जायेगा, ताकि इस प्रणाली की बारीकियों से रूबरू हो सकें और बाद में कोई समस्या न हो.
एसपी दीपक बरनवाल ने बताया कि इसका सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अपराधियों का नाम डालते ही पता चल जायेगा कि उक्त अपराधी का अपराधिक इतिहास क्या है. इस सिस्टम से पुलिस को काफी मदद मिलेगी. जिले के सभी थानों में कंप्यूटर सिस्टम उपलब्ध करा दिया गया है. सीसीटीवी कैमरे भी लगाये जायेंगे. सीसीटीएनएस को लागू करने की प्रक्रिया एक-दो महीने में पूर्ण कर ली जायेगी.
सीसीटीएनएस से ये होगा फायदा
सीसीटीएनएस के लागू पर इस नेटवर्क से जुड़ने के बाद जिले के थाना बाहर के थानों से भी लिंक हो जायेंगे. एफआईआर से लेकर थाने के अन्य डाटा को दूसरे थाने की पुलिस भी देख सकेगी. सीसीटीएनएस, इंटीग्रेटेड क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) का एक हिस्सा है. इसके तहत न्यायालय, थाना, अभियोजन और एफएसएल को भी जोड़ा जायेगा. इससे थाना कोर्ट से सीधा जुड़ जायेगे. एफआईआर से लेकर वारंट तक ऑनलाइन हो जायेगा.
आमलोगों को होगी सहूलियत
सीसीटीएनएस से न सिर्फ पुलिस बल्कि, आमलोगों को भी काफी सहूलियत होगी. लोग थानों में ऑनलाइन शिकायत भी दर्ज करा सकते हैं. इसके अलावा खोए और लापता सामाग्रियों की सूचना, चरित्र सत्यापन, चोरी हुई गाड़ियों की जानकारी भी ऑनलाइन मिल जायेगी. इससे गुमशुदा व्यक्तियों और अज्ञात शवों की भी जानकारी हासिल की जा सकती है.
भविष्य में घरेलू नौकर के सत्यापन से लेकर पासपोर्ट और वरीय नागरिकों के सत्यापन के लिए फॉर्म भरने का काम भी किया जा सकता है. ऑनलाइन शिकायत के अलावा पीड़ित अपनी एफआईआर को भी देख सकते हैं.
नहीं बच पायेंगे अपराधी
जिले में कोई अपराधी दूसरे राज्य से अपराध करके छिपा है और पुलिस के हत्थे चढ़ जाता है, तो उसकी वेरिफिकेशन सीसीटीएनएस के जरिए आसानी से हो सकेगी. इस सिस्टम के माध्यम से चंद मिनटों में उसका आपराधिक रिकॉर्ड आसानी से उपलब्ध हो जायेगा. इससे घटना के खुलासे में भी पुलिस को मदद मिलेगी.
वहीं जानकारों की मानें तो अपराधियों का फिंगरप्रिंट भी ऑनलाइन किया जायेगा. इसका फायदा यह होगा कि किसी घटनास्थल से ही फिंगर प्रिंट एफएसएल की टीम को उपलब्ध हो जायेगा. इसके बाद एफएसएल की टीम कंप्यूटर में डाल कर फिंगरप्रिंट के सहारे अपराधियों का पूरा इतिहास पता लगा सकेगी.
जानें क्या है सीसीटीएनएस
एसपी दीपक बरनवाल ने बताया कि सीसीटीएनएस भारत सरकार के राष्ट्रीय ई गवर्नेंस प्लान के अधीन एक योजना है. अपराध की जांच और अपराधियों की पहचान से संबंधित आईटी आधारित स्टेट ऑफ आर्ट ट्रैकिंग प्रणाली को विकसित करने की कोशिश की गयी है.
ई-गवर्नेंस के सिद्धांत को अपनाते हुए और राष्ट्रव्यापी नेटवर्किंग आधारित संरचना के निर्माण के लिए पुलिस की कार्यकुशलता और प्रभाव को बढ़ाने के लिए एक व्यापक एवं समेकित प्रणाली का निर्माण करना सीसीटीएनएस का मुख्य उद्देश्य है.
थानों में कंप्यूटर इंस्टॉल करने का चल रहा प्रोसेस
सीसीटीएनएस को लागू करने के लिए सभी थानों में उपलब्ध कराये गये कंप्यूटर सिस्टम को इंस्टॉल करने का प्रोसेस किया जा रहा है. डीआईओ प्रशांत कुमार ने बताया कि एनआईसी की वेबसाइट पर सभी थानों का ईमेल आईडी बनाने का काम पूरा कर लिया गया है. वहीं थानों का रजिस्ट्रेशन भी कर दिया गया है. अब थानों में कंप्यूटर सेट को इंस्टॉल किया जा रहा है.
उम्मीद है, यह काम भी शीघ्र पूरा हो जायेगा. इधर, एसपी ने बताया कि पुलिस अधिकारियों, डाटा ऑपरेटरों व जवानों को यह जानकारी दी जायेगी कि किस तरह से सीसीटीएनएस का इस्तेमाल किया जाता है. थाने के सभी डाटा को ऑनलाइन अपलोड करने, इसके बाद अपराधियों के इतिहास को भी ऑनलाइन अपलोड करने संबंधित प्रशिक्षण दिया जायेगा.

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