कुटुंबा : वर्तमान परिवेश में किसान को कम लागत व कम सिंचाई में अधिक उपज चाहिए. इसके लिए प्रभेद का चयन कर नवीनतम तकनीक अपनाना होगा. यह बातें महिको कंपनी के एमडीओ अजय कुमार वर्मा ने कही. वह मंगलवार को कुटुंबा प्रखंड के सुही गांव के किसान सुदर्शन सिंह के खेत में प्री-कॉमर्शियल डेमोसेट तकनीक से धान का फसल लगवा रहे थे.
प्री-कॉमर्शियल डेमो सेट के तहत हुई धान की रोपनी
कुटुंबा : वर्तमान परिवेश में किसान को कम लागत व कम सिंचाई में अधिक उपज चाहिए. इसके लिए प्रभेद का चयन कर नवीनतम तकनीक अपनाना होगा. यह बातें महिको कंपनी के एमडीओ अजय कुमार वर्मा ने कही. वह मंगलवार को कुटुंबा प्रखंड के सुही गांव के किसान सुदर्शन सिंह के खेत में प्री-कॉमर्शियल डेमोसेट तकनीक […]

इसके लिए उन्होंने सदर प्रखंड के बिजौली गांव में नर्सरी तैयार कराया है. परंपरागत विधि से खेती करने में उत्पादन में काफी ह्रास हो रहा है. साथ ही किट ब्याधि का प्रकोप भी अधिक देखा जा रहा है.
उन्होंने एक हीं खेत में अलग-अलग महिको कंपनी के हाईब्रीड जलधी 5222, मंसूरी 7029 व आरएक्सएलएल-62 तीन वेराईटी के धान का फसल लगवाया. उन्होंने फसल में सामान्य ढंग से रासायनिक व जैविक उर्वरक का प्रयोग करने का सुझाव दिया. किसानों से बताया कि बीच-बीच में कंपनी के अधिकारियों फसल का मुआयना करेंगे.
फसल तैयार हो जाने के पाश्चात्य कंपनी के देखरेख में हार्वेस्टिंग कराई जायेगी. इसके बाद उपज का वजन कर एक दूसरे वेराईटी से मिलान किया जायेगा. उन्होंने बताया कि इससे यह स्पष्ट हो जायेगा कि इस मिट्टी में तीनों में बेहत्तर सुट कौन वेराईटी करता है. जिस धान का उपज सबसे अधिक होगा, कंपनी अगले वर्ष व्यापक पैमाने पर उस वेराईटी की खेती करायेगी.
उन्होंने बताया कि जलधि और आरएक्सएलएल 140 से 145 दिनों में व मंसूरी 150 से 160 दिनों में तैयार हो जाता है. एमडीओ ने बताया कि इस तरह का प्रयोग कुटुंबा, चनकप, रिसियप, नटवा परसावां आदि दर्जनों गांवों में किया गया है. मौके पर कौशल कुमार, कृष्णा मेहता, धनंजय मेहता, अर्जुन पासवान आदि थे. गौरतलब है कि उक्त कंपनी खुद से बिजौली गांव से बिचड़ा लाकर धान की खेती करा रही है. इससे किसानों में खासा उत्साह है.