औरंगाबाद : लापरवाह पुलिस अधिकारी सावधान हो जाएं. वरना लाल घेरे में नाम शुमार हो सकता है. दरअसल अपराध पर अंकुश लगाने को लेकर डीजीपी गुप्तेश्वर पांडेय ने एक नया तरीका अपनाया है. अपराध से प्रभावित जिले में अब क्राइम ऑडिट की जायेगी. इसके लिए गतिशील दस्ते का गठन किया गया है.
जो गुप्त तरीके से क्षेत्र में अपराध और पुलिसिया कार्रवाई की जानकारी इकट्ठा करेगी. एक पुलिस पदाधिकारी ने बताया कि पुलिस इतिहास में पहली बार इस तरह का काम होगा.
एडीजी और आइजी स्तर के पदाधिकारी गतिशील दस्ते में शामिल होंगे. वैसे जिले जो अपराध से प्रभावित है वहां चार दिनों तक लगातार गतिशील दस्ता कैंप कर पुलिस अनुमंडल और पुलिस अंचलों में अपराध नियंत्रण को लेकर की जा रही कार्रवाई से रू-ब-रू होगा.
यह दल सक्रिय अपराधियों के विरुद्ध विशेष अभियान, लंबित वारंट कुर्की का निष्पादन एवं गंभीर अपराधों के सही अनुसंधान के लिए मार्गदर्शन भी करेगा. दल के पदाधिकारी अनुमंडल व थानों के अभिलेखों का अवलोकन और समीक्षा करेंगे. विधि सम्मत कार्रवाई के लिए भी प्राधिकृत होंगे.
अपराध नियंत्रण में लापरवाही बरतने वाले पदाधिकारी को टीम में शामिल अधिकारी चिह्नित करेंगे और उनके विरुद्ध अनुशासनिक कार्रवाई भी करेंगे. इस दल में सीआईडी के भी पदाधिकारी होंगे. डीजीपी द्वारा उठाये गये इस कदम के बाद वैसे पुलिस अधिकारियों में भय का माहौल है, जो थोड़े लापरवाह किस्म के हैं.
