औरंगाबाद नगर : धान से पहले खेतों की सेहत सुधारने के लिए किसानों के पास वक्त है. खेती का नया सीजन शुरू होने के पहले मिट्टी को पोषक तत्वों की भरपूर जरूरत होगी. खरीफ का मौसम आते ही कृषि विभाग ने खेतों को पोषक तत्व प्रदान करने को ढैंचा की खेती का निर्णय लिया है. जून के दूसरे सप्ताह तक ढैंचा की खेती का लक्ष्य रखा गया है, जिससे मिट्टी को नयी उर्जा मिलने के साथ ही खरीफ का नया सीजन शुरू होने पर पैदावार भी अच्छी होगी.
ढैंचा की करें खेती,मिट्टी को मिलेगा पोषक तत्व
औरंगाबाद नगर : धान से पहले खेतों की सेहत सुधारने के लिए किसानों के पास वक्त है. खेती का नया सीजन शुरू होने के पहले मिट्टी को पोषक तत्वों की भरपूर जरूरत होगी. खरीफ का मौसम आते ही कृषि विभाग ने खेतों को पोषक तत्व प्रदान करने को ढैंचा की खेती का निर्णय लिया है. […]

हरी खाद के नाम से विख्यात ढैंचे की खेती मुख्य रूप से खेतों में पोषक तत्वों को बढ़ाने तथा उसमें जैविक पदार्थों की पूर्ति करने के लिए किया जाता है. खेत में ढैंचा की उपज होने के बाद उसके पौधों को हल चलाकर मिट्टी में मिला दिया जाता है. इसके पौधे प्रचुर मात्रा में यूरिया का स्त्रोत होने के कारण भूमि की उर्वरा शक्ति को बढ़ा देता है. इसमें खास यह भी है कि इसकी खेती से किसानों को जहां नयी फसल में उर्वरक की बचत होगी. वहीं खेत की सिंचाई के लिए पानी भी कम मात्रा में देनी होती है.
इसकी जानकारी देते कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ नित्यानंद ने बताया कि खेत में इसके बीज बोने के बाद एक माह तक किसानों को इंतजार करना होता है. जुलाई के प्रथम सप्ताह तक इसके पौधे दो से ढाई फुट तक हो जाते हैं. ऐसे में खेत की जुताई कर सारे पौधों को किसी एक ही दिशा में मिट्टी में पलट दिया जाता है. इस प्रकार ढैंचा की हरी पौध खेत की मिट्टी में दब कर दो से तीन दिनों में सड़ने लगती है, जिससे पौधे में मौजूद तमाम पोषक तत्व खेत की मिट्टी में एकत्र हो जाते हैं. इस प्रकार खरीफ की खेती के दौरान पौधों को भरपूर मात्रा में पोषक तत्व मिल जाते हैं.