चैत नवरात्र में एक ही दिन महाअष्टमी और नवमी की होगी पूजा

औरंगाबाद नगर : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा छह अप्रैल यानी कि शनिवार से शुरू हो रहा है. इसी के साथ वासंतिक नवरात्रि भी प्रारंभ हो जाएंगे. चैत्र नवरात्र में आदि शक्ति जगदम्बा के साथ नव गौरी के दर्शन पूजन का पुण्य फलदायक विधान है. इस नवरात्र में नवमी तिथि के क्षय होने से इस बार अष्टमी-नवमी […]

औरंगाबाद नगर : चैत्र शुक्ल प्रतिपदा छह अप्रैल यानी कि शनिवार से शुरू हो रहा है. इसी के साथ वासंतिक नवरात्रि भी प्रारंभ हो जाएंगे. चैत्र नवरात्र में आदि शक्ति जगदम्बा के साथ नव गौरी के दर्शन पूजन का पुण्य फलदायक विधान है.

इस नवरात्र में नवमी तिथि के क्षय होने से इस बार अष्टमी-नवमी तिथि का मान 13 अप्रैल को होगा. इस कारण देवी भक्त नवमी का व्रत 13 अप्रैल शनिवार को करेंगे. साथ ही सप्तमी तिथि 12 अप्रैल को दिन में 10 बजकर 18 मिनट तक ही है. अत: अष्टमी तिथि की महानिशा पूजा 12 अप्रैल को ही यानी शुक्रवार की रात्रि में की जायेगी.
पंडितों की मानें तो खास बात जानने योग्य यह है कि 14 अप्रैल को प्रात: छह बजे तक ही नवमी है. अत: इसके पूर्व ही नवरात्रि अनुष्ठान की समाप्ति का हवन-पूजन कर लेना बेहतर होगा. वहीं, नवरात्रि व्रत किये भक्तगण पारण इसी दिन प्रात: छह बजे के बाद दशमी तिथि में यानि दिन रविवार को कर लेंगे. धर्मशास्त्र के अनुसार मां भगवती की उपासना में कलश स्थापन प्रतिपदा तिथि में प्रात: समय किया जाना सर्वोत्तम है.
यदि सुबह के समय कलश स्थापना में कोई अड़चन पैदा हो रही है तो वे मध्याह्न अभिजीत मुहूर्त (11.30 से 12.18 बजे के मध्य) में विकल्प के रूप में कर सकते हैं. पंडित सतीश पाठक ने बताया कि महाष्टमी का व्रत 13 अप्रैल दिन शनिवार को उदया तिथि में किया जायेगा.
वहीं, नवमी तिथि का क्षय होने से इसी दिन अनुदया नवमी तिथि में नवमी का व्रत भी किया जायेगा. उन्होंने बताया कि 14 अप्रैल को प्रात: छह बजे तक ही नवमी है. अत: नवरात्र अनुष्ठान समाप्ति का हवन पूजन का कार्य इससे पूर्व ही कर लेना उचित होगा. हालांकि, उदया तिथि को मानने वाले इसी दिन रामनवमी पूजा करेंगे.

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By Prabhat Khabar Digital Desk

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