नये मकान से बेटी की शादी का संजोया था सपना
औरंगाबाद-देव मुख्य मार्ग पर हुआ हादसा
औरंगाबाद कार्यालय : औरंगाबाद-देव मुख्य मार्ग पर महाराणा प्रताप कॉलेज के समीप सोमवार की सुबह हुई सड़क हादसे में सीआइएसएफ का जवान व करमडीह गांव निवासी सत्येंद्र सिंह (50) एवं हरिओम सिंह के तीन वर्षीय पुत्र समर कुमार की मौत हो गयी,जबकि कार में बैठे दो महिला व मासूम बच्चे सहित सात घायल हो गये. घायलों का इलाज प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र देव और सदर अस्पताल में किया गया. सदर अस्पताल ने घायलों की गंभीर हालत को देखते हुए चार घायलों को बेहतर इलाज के लिए किसी बड़े अस्पताल के लिए रेफर किया गया.
जानकारी के अनुसार करमडीह गांव के सत्येंद्र सिंह औरंगाबाद शहर के गंगटी पावरग्रिड के समीप नये मकान का निर्माण करा कर सोमवार को गृह प्रवेश करने वाले थे.
नये मकान के गृह प्रवेश के पूर्व कुल देवता को लाने अपने पैतृक गांव गये हुए थे. सुबह-सुबह सत्येंद्र सिंह अपने भांजा व गंगटी गांव के मिथलेश सिंह के साथ-साथ परिवार के सदस्यों को लेकर करमडीह गांव से औरंगाबाद शहर लौट रहे थे, इसी बीच उनकी रफ्तार भरी कार अनियंत्रित होकर पेड़ से टकरा गयी. इस दर्दनाक हादसे में सत्येंद्र सिंह की मौत मौके पर हो गयी,
जबकि कार में बैठे उनकी पत्नी शोभा देवी, पिंटू सिंह की पत्नी जूली देवी, हरिओम सिंह की पत्नी प्रतिमा देवी,मासूम कुमुद कुमार,छोटी कुमारी,समर कुमार सहित सात लोग घायल हो गये. आसपास के लोगों ने बहादुरी का परिचय देते हुए घायलों को पीएचसी देव भेजा और फिर पुलिस को सूचना दी. इधर पीएचसी देव से घायलों को सदर अस्पताल भेजा गया, जहां से प्राथमिक उपचार के बाद चार घायलों को किसी बड़े अस्पताल भेजा गया. पता चला कि जमुहार मेडिकल कॉलेज में इलाज के दौरान समर की मौत हो गयी.
घायल मां के सामने मासूम बेटे ने तोड़ा दम : जमुहार मेडिकल कॉलेज में हरिओम सिंह की पत्नी प्रतिमा देवी और मासूम बेटा समर का इलाज चल रहा था. एक तरफ बेड पर मां का इलाज चल रहा था तो दूसरी तरफ बेटे का. इसी बीच तड़पते हुए बेटे ने दम तोड़ दिया. हालांकि मां को किसी ने इसकी जानकारी नहीं दी,पर पिता की आंखें आंसुओं के सैलाब में डूबी रही. हर कोई इस घटना से स्तब्ध था.
नये मकान के गृह प्रवेश के बाद बेटी की शादी की होनी थी तैयारी: करमडीह और गंगटी गांव के सैकड़ों लोग अस्पताल में मौजूद थे. वैसे घटना की सूचना पाकर रेडक्रॉस के चेयरमैन सतीश कुमार सिंह,सचिव दीपक कुमार सहित कई लोग भी वहां पहुंचे थे. सभी घटना पर अफसोस जता रहे थे. मृतक सत्येंद्र सिंह के रिश्तेदार उमेश सिंह, भांजा विदेश सिंह की हालत बद से बदतर थी. इन लोगों ने बताया कि सत्येंद्र सिंह का बस अरमान था कि गृह प्रवेश के बाद नये मकान से अपनी बेटी शालू का हाथ पीला करे. इसकी तैयारी भी शुरू कर दी गयी थी, पर हादसे ने सब कुछ बर्बाद कर दिया. दोपहर बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया और फिर परिजनों के हवाले किया गया.
नये घर में जाने की खुशियां मातम में बदल गयीं
हर व्यक्ति का एक सपना होता है कि उसका एक अपना घर हो. अगर घर शहर में हो ,जहां सारी सुविधाएं मौजूद हो तो उससे बेहतर और क्या हो सकता है. करमडीह गांव के सत्येंद्र सिंह और उनके परिवार ने यही सपना देखा था. घर का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद औरंगाबाद शहर के गंगटी पावरग्रिड वाले नये मकान में सोमवार को गृह प्रवेश की तिथि भी निर्धारित कर दी गयी थी. जान पहचान वालों से लेकर रिश्तेदारों का जमावड़ा भी लग चुका था. गंगटी गांव के रिश्तेदार व अन्य लोग तैयारियों में जुटे थे.
इसी बीच एक खबर पहुंची कि कुल देवता को लाने गये सत्येंद्र सिंह व परिवार का अन्य सदस्य सड़क हादसे का शिकार हो गये. इसके बाद तो घर के गृह प्रवेश की रौनक अचानक धूमिल हो गयी और खुशियों का माहौल मातम में बदल गया. आनन-फानन में दौड़ते हुए लोग सदर अस्पताल पहुंचे और वहां का दृश्य देख चौंक गये. सदर अस्पताल में शव के साथ-साथ घायल मासूम बच्चों को देख हर व्यक्ति का गला रूंध गया और न चाहते हुए भी उनके आंखों से आंसू निकल पड़े.
