अरवल जिले में खरीफ मौसम की खेती पूरे जोर-शोर से चल रही है. लगातार हो रही बारिश और बेहतर सिंचाई व्यवस्था के कारण धान की रोपाई युद्ध स्तर पर जारी है. सुबह से लेकर शाम तक किसान अपने परिवार और उपलब्ध मजदूरों के साथ खेतों में मेहनत करते नजर आ रहे हैं. गांवों में खेतों का नजारा पूरी तरह बदल गया है और किसान समय रहते रोपाई पूरी करने में जुटे हैं.
सोन नहर से मिल रहा भरपूर पानी, किसानों में बढ़ी उम्मीद
इस वर्ष समय पर हुई अच्छी बारिश के साथ मुख्य सोन नहर और उसकी वितरनी नहरों से नियमित जलापूर्ति होने के कारण अधिकांश खेतों तक सिंचाई का पानी पहुंच गया है. जिन इलाकों में पहले पानी की समस्या रहती थी, वहां भी इस बार पर्याप्त नमी है. किसान अगले एक सप्ताह के भीतर धान की रोपाई पूरी कर बेहतर उत्पादन सुनिश्चित करना चाहते हैं.
मजदूरों की कमी से बढ़ी किसानों की चिंता
खेती के सबसे अहम दौर में किसानों के सामने सबसे बड़ी चुनौती खेतिहर मजदूरों की कमी बन गई है. बड़ी संख्या में मजदूर रोजगार की तलाश में सूरत, गुजरात, दिल्ली, मुंबई, पंजाब और अन्य राज्यों में चले गए हैं. इसके कारण गांवों में मजदूर आसानी से उपलब्ध नहीं हो रहे हैं और किसानों को उन्हें तलाशने में काफी परेशानी हो रही है.
बढ़ी मजदूरी, किसानों के बीच मजदूरों को लेकर प्रतिस्पर्धा
मजदूरों की कमी का असर मजदूरी दर पर भी साफ दिखाई दे रहा है. उपलब्ध मजदूर पहले की तुलना में अधिक मजदूरी की मांग कर रहे हैं. कई जगह किसानों और मजदूरों के बीच मजदूरी को लेकर लंबी बातचीत हो रही है. समय पर रोपाई पूरी करने के लिए किसान मजबूरी में अधिक मजदूरी देने को तैयार हैं. कई किसान मजदूरों को भोजन और अन्य सुविधाएं देकर अपने खेतों में काम कराने की कोशिश कर रहे हैं.
समय पर रोपाई से बेहतर उत्पादन की उम्मीद
किसानों का कहना है कि फिलहाल मौसम खेती के लिए पूरी तरह अनुकूल है. खेतों में पर्याप्त पानी उपलब्ध है और यदि अगले कुछ दिनों में रोपाई पूरी हो जाती है तो अच्छी पैदावार मिलने की संभावना बढ़ जाएगी. इसलिए किसान अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाने के बावजूद खेती का कार्य तेजी से पूरा करने में जुटे हैं.
कृषि विशेषज्ञों ने समय पर रोपाई को बताया जरूरी
कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि धान की रोपाई समय पर पूरी होना बेहतर उपज के लिए बेहद जरूरी है. उनका कहना है कि मजदूरों की कमी से खेती की लागत बढ़ रही है, जिसका असर किसानों की आय पर पड़ सकता है. फिलहाल लगातार बारिश और नहरों से मिल रहे पानी ने किसानों की उम्मीदें बढ़ाई हैं, लेकिन मजदूरों की कमी उनकी सबसे बड़ी चिंता बनी हुई है.
