Arwal News: जिले में स्मैक, ब्राउन शुगर और नशीली दवाओं का जाल तेजी से फैलता जा रहा है. इसकी चपेट में सबसे अधिक किशोर और युवा वर्ग आ रहे हैं. शहरी से लेकर ग्रामीण क्षेत्रों तक सूखे नशे का कारोबार फैल चुका है और बाजारों में नशीले पदार्थ आसानी से उपलब्ध हो रहे हैं. शराबबंदी के बाद नशेबाजों का झुकाव प्रतिबंधित दवाओं और सूखे नशे की ओर बढ़ा है. बिना चिकित्सकीय परामर्श के कॉरेक्स, कोजॉम, डाइलेक्स सिरप, स्पास्मी, नाइट्रोसम और फोर्टविन जैसी दवाओं का इस्तेमाल बड़े पैमाने पर किया जा रहा है. जिले के कई
मनोचिकित्सकों ने कहा गलत संगत नशे की सबसे बड़ी वजह
नशामुक्ति केंद्र में हर दिन नशे के आदी युवा पहुंच रहे हैं. काउंसलर गीतांजलि ने बताया कि सप्ताह में चार से पांच लोग नशे से छुटकारा पाने के लिए पहुंचते हैं, जिनमें अधिकतर किशोर और युवा होते हैं. महीने में आठ से दस ऐसे मरीज आते हैं, जो गंभीर रूप से नशे की गिरफ्त में होते हैं. मनोचिकित्सकों का कहना है कि गलत संगत नशे की सबसे बड़ी वजह है. यदि कोई व्यक्ति सच में नशा छोड़ना चाहता है तो उसे सबसे पहले अपनी संगत बदलनी होगी.
चोरी की घटनाओं में भी वृद्धि हो रही
मेडिकल स्टोरों में इन दवाओं का स्टॉक मिलने से नशे के कारोबार के विस्तार का अंदाजा लगाया जा सकता है. जिले में चरस और ब्राउन शुगर का अवैध कारोबार भी तेजी, चोरी की घटनाओं में भी हो रही बढ़ोतरी सूखे नशे की लत के कारण छोटे-छोटे चोरी की घटनाओं में भी वृद्धि हो रही है. खेतों से मोटर चोरी होना, ट्रैक्टर की बैटरी खुल जाना जैसी घटनाएं अब आम हो गयी हैं. ग्रामीण क्षेत्रों में लोग इससे परेशान है. से बढ़ रहा है. इसमें किशोर और युवा वर्ग बड़ी संख्या में शामिल हो रहे हैं. शहर के सुनसान इलाकों, सड़क किनारे और सोन नदी तट पर युवाओं को समूह बनाकर नशा करते हैं.
डॉक्टरों ने दी चेतावनी
डॉ. पंकज ने बताया कि नशीली दवाओं के सेवन से शरीर में पानी की कमी, किडनी की बीमारी, अवसाद और मानसिक तनाव जैसी गंभीर समस्याएं हो सकती है. अधिक मात्रा में सेवन करने पर हार्ट अटैक का खतरा भी बढ़ जाता है. उन्होंने कहा कि शुरुआत में नशा राहत और आनंद का एहसास कराता है, लेकिन बाद में यह व्यक्ति को आर्थिक, सामाजिक और मानसिक रूप से पूरी तरह कमजोर बना देता है. उन्होंने लोगों से नशे से दूर रहने और युवाओं को जागरूक करने की अपील की.
करते देखा जा सकता है. किशोर वर्ग के बच्चे सुलेशन और फेविकोल जैसे पदार्थों का भी सेक्न कर रहे हैं, जो बेहद खतरनाक माना जा रहा है.
ALSO READ: पटना वीमेंस कॉलेज में एडमिशन की दौड़ शुरू, प्रवेश परीक्षा से तय होगा बीए और बीएससी ऑनर्स में दाखिला
