Arwal District Development : 20 अगस्त 2001 को जहानाबाद से अलग होकर अरवल जिले का गठन किया गया था. उग्रवादी गतिविधियों पर नियंत्रण और प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के उद्देश्य से अस्तित्व में आया अरवल जिला अब 25 साल का हो गया है. गुरुवार को जिला प्रशासन की ओर से 25वां स्थापना दिवस धूमधाम से मनाया जायेगा.
दो दशक में गांव-गांव पहुंची बुनियादी सुविधाएं
जिला बनने के बाद अरवल में विकास की रफ्तार बढ़ी है. गांव-गांव सड़कों का निर्माण हुआ, बिजली पहुंची और हर घर नल का जल योजना का लाभ लोगों तक पहुंचा. नाली-गली का पक्कीकरण भी हुआ. पहले जहां लोगों को न्यायिक कार्यों के लिए जहानाबाद जाना पड़ता था, वहीं अब अरवल में ही जिला न्यायालय की सुविधा उपलब्ध है.
161 एकड़ जमीन पर विकसित होगा औद्योगिक क्षेत्र
अरवल में उद्योगों की कमी लंबे समय से लोगों को खटकती रही है. अब उद्योग के क्षेत्र में तस्वीर बदलने की तैयारी है. जिला प्रशासन ने उद्योग लगाने के लिए 161 एकड़ जमीन उद्योग विभाग को उपलब्ध करा दी है. कोरियम और सोनवर्षा मौजा में औद्योगिक क्षेत्र विकसित करने की योजना है और भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया जारी है.
पांच प्रखंड और 64 पंचायतों वाला जिला
अरवल जिला पांच प्रखंड, एक अनुमंडल, एक नगर परिषद, एक नगर पंचायत और 64 पंचायतों में फैला है. जिले का कुल क्षेत्रफल 638 वर्ग किलोमीटर है. वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार जिले की आबादी करीब 7 लाख है और जनसंख्या घनत्व 1100 व्यक्ति प्रति वर्ग किलोमीटर है. जिले में कुल 308 गांव हैं.
स्वास्थ्य सुविधाओं में भी हुआ विस्तार
जिला बनने के बाद स्वास्थ्य के क्षेत्र में कई महत्वपूर्ण सुविधाएं विकसित हुई हैं. सदर अस्पताल के अलावा एससीएनयू, पीकू वार्ड, 50 बेड का फील्ड अस्पताल और बुजुर्गों के लिए बुनियाद केंद्र जैसी सुविधाएं उपलब्ध हैं. अब अरवल में मेडिकल कॉलेज बनने की दिशा में भी कदम बढ़ चुका है और इसका शिलान्यास किया जा चुका है.
शिक्षा के क्षेत्र में कई संस्थान खुले
अरवल में शिक्षा के क्षेत्र में भी सुविधाओं का विस्तार हुआ है. महिला और पुरुष आईटीआई, अभियंत्रण कॉलेज, पॉलिटेक्निक कॉलेज, जवाहर नवोदय विद्यालय, पारा मेडिकल कॉलेज, जीएनएम और एएनएम कॉलेज सहित कई संस्थान स्थापित हुए हैं. मुख्यालय में डिग्री कॉलेज की सुविधा भी उपलब्ध है.
छात्रों के लिए छात्रावास और ई-लाइब्रेरी की सुविधा
छात्र-छात्राओं के लिए भीमराव आंबेडकर छात्रावास, बालिका छात्रावास और कर्पूरी ठाकुर छात्रावास उपलब्ध हैं. अत्यंत पिछड़ा वर्ग की बालिकाओं के लिए विद्यालय सह छात्रावास बनाया गया है. प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करने वाले युवाओं के लिए निबंधन सह परामर्श केंद्र की सुविधा भी है. जिले के 64 विद्यालयों में ई-लाइब्रेरी की सुविधा उपलब्ध है.
न्याय और पुलिस व्यवस्था भी हुई मजबूत
अरवल में जिला न्यायालय शुरू हो चुका है, जबकि मंडल कारा का निर्माण अंतिम चरण में है. जिला मुख्यालय में सदर थाना के अलावा महिला थाना और एससी-एसटी थाना भी है. यातायात थाना और साइबर थाना भी काम कर रहे हैं. इससे जिले में कानून व्यवस्था और न्यायिक सुविधाओं को मजबूती मिली है.
रेल परियोजना से कनेक्टिविटी को मिलेगी नई रफ्तार
अरवल को रेलवे से जोड़ने के लिए बिहटा-औरंगाबाद रेल परियोजना को केंद्र सरकार से हरी झंडी मिल चुकी है. परियोजना का सर्वे पूरा हो चुका है और जमीन अधिग्रहण की तैयारी चल रही है. इस रेल परियोजना के पूरा होने में करीब पांच साल लगने का अनुमान है. इससे जिले की कनेक्टिविटी और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
बाईपास से शहर को जाम से मिलेगी राहत
अरवल शहर को जाम से राहत दिलाने के लिए पिपरा बंगला से कोरियम तक नहर पर सड़क का निर्माण किया जा रहा है. वहीं एनएच-139 पर प्रसादी इंग्लिश से पिपरा बंगला तक ग्रीनफील्ड बाईपास निर्माण को भी मंजूरी मिल गयी है. इसकी टेंडर प्रक्रिया चल रही है.
बिजली और ऊर्जा के क्षेत्र में भी विस्तार
जिले में ऊर्जा क्षेत्र में चार पनबिजली परियोजनाएं हैं. सभी गांवों तक बिजली पहुंचाने के लिए एक पावर ग्रिड और आधा दर्जन से अधिक पावर सब स्टेशन स्थापित किये गये हैं. बिजली व्यवस्था मजबूत होने से ग्रामीण और औद्योगिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
कृषि और बालू खनन से अर्थव्यवस्था को सहारा
कृषि के क्षेत्र में जिले में कृषि विज्ञान केंद्र स्थापित है, जहां कृषि से जुड़े शोध और किसानों को तकनीकी जानकारी दी जाती है. किसानों के लिए मिट्टी जांच की सुविधा भी उपलब्ध है. सिंचाई के लिए नहर और मोटर पंप सेट का इस्तेमाल किया जाता है. वहीं सोन नदी से बड़े पैमाने पर बालू खनन होता है, जिसका परिवहन दूसरे राज्यों तक किया जाता है. पुनपुन नदी में भी बालू खनन होता है.
छोटे उद्योगों के साथ बड़े उद्योगों की तैयारी
अरवल में लघु और कुटीर उद्योग तेजी से बढ़ रहे हैं. राइस मिल, फ्लोर मिल और छोटे फूड प्रोसेसिंग यूनिट संचालित हो रहे हैं. आने वाले वर्षों में औद्योगिक क्षेत्र विकसित होने के बाद जिले में उद्योगों का विस्तार होने की उम्मीद है. उद्योग विभाग की ओर से नए उद्योग लगाने वाले लोगों को सहयोग देने की भी तैयारी है.
खेल सुविधाओं पर भी सरकार का जोर
खेल के क्षेत्र में अरवल में खेल भवन सह व्यायामशाला की सुविधा उपलब्ध है. करपी के झिकटिया में अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स सह स्टेडियम का निर्माण चल रहा है. जिले की 36 पंचायतों में खेल मैदान बन चुके हैं. अरवल और वंशी में भी स्टेडियम निर्माण प्रस्तावित है.
18.73 करोड़ से बनेगा अत्याधुनिक प्रेक्षागृह
जिले में करीब 18 करोड़ 73 लाख रुपये की लागत से अत्याधुनिक प्रेक्षागृह का निर्माण किया जायेगा. इसके अलावा बेरोजगार युवाओं को प्रशिक्षण देने के लिए रोजगार प्रशिक्षण केंद्र भी संचालित है. आने वाले समय में ये सुविधाएं जिले के सामाजिक और सांस्कृतिक विकास को नई दिशा दे सकती हैं.
25 साल बाद विकास की नई उड़ान
25 साल की उम्र में पहुंच चुका अरवल जिला अब विकास के अगले चरण में प्रवेश कर रहा है. मेडिकल कॉलेज, औद्योगिक क्षेत्र, रेल परियोजना, बाईपास, स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स और स्टेडियम जैसी योजनाओं से जिले की तस्वीर बदलने की उम्मीद है. प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और युवाओं के प्रयास से अरवल को देश के अग्रणी जिलों में शामिल कराने की दिशा में काम जारी है.
