बालू वाहनों से शहर जाम, प्रशासन मौन

अरवल : सोन नदी से बालू निकासी की अवधि के महज अब दो दिन ही शेष गये हैं. इस लिहाज से निर्माण कंपनी और अपना आशियाना बना रहे लोगों में बालू स्टॉक करने की होड़ मची है. हजारों की संख्या में ट्रक बालू घाट सहित एनएच 139 पर बुधवार की रात से ही खड़े हैं, […]

अरवल : सोन नदी से बालू निकासी की अवधि के महज अब दो दिन ही शेष गये हैं. इस लिहाज से निर्माण कंपनी और अपना आशियाना बना रहे लोगों में बालू स्टॉक करने की होड़ मची है. हजारों की संख्या में ट्रक बालू घाट सहित एनएच 139 पर बुधवार की रात से ही खड़े हैं, जिसका नतीजा अरवलवासियों को भुगतना पड़ रहा है. सड़क किनारे वाहनों की लंबी कतार से सड़क जाम की समस्या से जूझ रहा है शहर.

सुबह जब शहर के लोगों की नींद खुली तो एनएच 139 को पूरी तरह जाम पाया. एकबारगी तो लोगों को लगा कि कहीं कोई घटना तो नहीं घटी, जिससे सड़क जाम है, लेकिन वक्त के साथ पता चला कि ये ट्रक वाले बालू लोड करने के लिए लंबी कतार लगाकर घंटों से खड़े हैं. शहर की तंग सड़कों पर लगी लंबी सड़क जाम से लोग बेहाल हैं. वहीं, बालू माफिया और पुलिस वाले मालामाल हैं. एनएच 139 लगभग 4-5 घंटे जाम रहा. सोन नदी पर बना सहार पुल तो खबर लिखे जाने तक जाम था. मोर मुकुट प्राइवेट लिमिटेड जिले में पांच वैसे बालू घाट चला रही है, जहां से सिर्फ ट्रकों से बालू का उठाव होता है.

चूंकि सोन नदी का बालू पक्का निर्माण कार्य के लिए उत्तम क्वालिटी का माना जाता है. इसलिए यहां का बालू छपरा, सीवान, मोतिहारी, नवादा, बिहारशरीफ, बक्सर, सासाराम और नेपाल तक बेची जाती है. यही कारण है कि बड़ी संख्या में ट्रक सड़क के किनारे कतारबद्ध हैं. बालू कंपनी भले ही मोटा मुनाफा कमा रही हो, लेकिन लोग उसके कारण परेशान हैं. वहीं प्रशासन भी जाम को लेकर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा है.

डीएम से करना पड़ेगी बात: वहीं अनुमंडल पदािधकारी किरण िसंह ने कहा कि जाम की हमें हमें जानकारी मिली है. इसके लिए डीएम से बात करेंगे, जो निर्देश मिलेगा, उसके अनुसार कार्रवाई की जायेगी.

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