भोजपुर : शाहपुर के हरि नारायण प्लस टू विद्यालय का नाम बदलने पर विरोध, लोगों ने मूल नाम रखने की मांग की

बिहार सरकार द्वारा 551 सरकारी विद्यालयों के नाम बदलकर सरस्वती विद्या निकेतन करने के फैसले ने राज्य भर में बहस छेड़ दी है. शाहपुर में भी इस फैसले का पुरजोर विरोध हो रहा है. लोगों का कहना है कि नाम बदलने से शिक्षा का स्तर नहीं सुधरेगा.

Shahpur School Name Change : सूबे में सरकारी विद्यालयों के नाम बदलने की कवायद ने नए विषय पर चर्चा करने पर लोगों को मजबूर कर दिया है. सरकार ने राज्य के 551 विद्यालयों का नाम बदलकर सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) कर दिया है. सरकार का कहना है कि इससे विद्यालयों का शैक्षणिक स्तर अच्छा होगा.

सरकार के इस कदम ने बुद्धिजीवियों, आम लोगों और राजनीतिज्ञों के बीच एक नई बहस को जन्म दिया है. सरकार का यह कदम पूरे बिहार में चर्चा का विषय बना हुआ है. शाहपुर भी इससे अछूता नहीं है. इसकी आंच शाहपुर में भी पहुंच चुकी है. शाहपुर के बुद्धिजीवियों और आम लोगों में भी आक्रोश दिख रहा है.

लोग अलग-अलग तरीके से अपना विरोध व्यक्त कर रहे हैं. लोगों का कहना है कि नाम बदलने से सरकारी शिक्षा के स्तर को अच्छा नहीं किया जा सकता है. पिछले 20 साल से बिहार में एनडीए की सरकार है. इसके बावजूद भी सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का स्तर अपेक्षाकृत सही नहीं हो सका है.

लोगों का कहना है कि अगर सरकारी विद्यालयों में शिक्षा का स्तर अच्छा होता, तो नित्य नए-नए प्राइवेट स्कूल नहीं खुलते. सरकारी विद्यालयों में फीस कम होने के बावजूद भी लोग अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रहे हैं, जबकि सरकारी स्कूल में सरकार बच्चों को कई तरह की सुविधा प्रदान कर रही है, उसके बावजूद भी प्राइवेट स्कूल खुल रहे हैं और चल रहे हैं.

राजनीतिक और सामाजिक प्रतिक्रियाएं तथा भगवाकरण के आरोप

शाहपुर के मुन्ना पांडे का कहना है कि सरकार शिक्षा के विकास के नाम पर शिक्षा का भगवाकरण कर रही है और पूर्वजों द्वारा दान किए गए बहुमूल्य जमीन और विद्यालयों से उनके नाम को हटाने की साजिश की जा रही है. बलदेव पांडे उर्फ पुतुल पांडे, पप्पू पांडे, शिव प्रसन्न यादव, शिव कुमार सिंह कुशवाहा जैसे लोगों का कहना है कि सरकार शिक्षा के नाम पर राजनीति कर रही है.

शाहपुर नगर पंचायत के जदयू नेता, पूर्व उप मुख्य पार्षद तथा उप मुख्य पार्षद झुनिया देवी के प्रतिनिधि गुप्तेश्वर साह ने इस निर्णय पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त करते हुए इसे शिक्षा का भगवाकरण और राजनीति से प्रेरित कदम करार दिया है.

विद्यालय का इतिहास और बाबू हरि नारायण सिन्हा का योगदान

उन्होंने कहा कि यह विद्यालय इस क्षेत्र की ऐतिहासिक धरोहर है. उन्होंने कहा कि बाबू हरि नारायण सिन्हा ने अपनी बेशकीमती जमीन इस विद्यालय को बनाने के लिए दान की, ताकि क्षेत्र के लोग शिक्षित हो सकें. इस विद्यालय को बनाने में ग्रामीण लोगों ने भी अपने हैसियत के अनुसार मदद की.

लोग उस जमाने में भी प्रतिदिन मुट्ठी भर अनाज विद्यालय के नाम पर निकालते थे और विद्यालय के निर्माण में अपना सहयोग दिए थे. बाबू हरि नारायण सिन्हा ने इस विद्यालय की नींव 1905 में रखी और 1905 में ही विद्यालय की स्थापना हुई.

1940 में इस विद्यालय को मान्यता मिल गई. शाहाबाद डिस्ट्रिक्ट बोर्ड की स्थापना 1938 में हुई. बाबू हरि नारायण सिन्हा 1938 में डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के वाइस चेयरमैन थे. 1938 में बने डिस्ट्रिक्ट बोर्ड के चेयरमैन, वाइस चेयरमैन सहित कमेटी के सदस्यों का नाम संगमरमर की पट्टी पर अंकित है, जो जिला परिषद भवन के बरामदे में लगा हुआ है. बाबू हरि नारायण सिन्हा उस जमाने में कलकत्ता विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट थे.

ऐतिहासिक पहचान से छेड़छाड़ और जनता की मांग

एनडीए की सरकार ऐतिहासिक महत्व के लोगों के नाम को भी हटाने पर आमदा है. यह मामला सिर्फ शाहपुर के हरि नारायण प्लस टू उच्च विद्यालय का नहीं है, बल्कि पूरे बिहार के विद्यालयों का है.

उस जमाने में सक्षम और संपन्न लोगों ने अपने क्षेत्र के लोगों को शिक्षित करने के लिए अपनी बेशकीमती जमीन में विद्यालय बनवाया था, ताकि लोग शिक्षित हो सकें और समाज में सुधार लाया जा सके. ऐसे समाज सुधारकों के नाम को हटाना उनके और उनके वंशजों के प्रति घोर अन्याय है. विद्यालय क्षेत्र की ऐतिहासिक पहचान और गौरव से जुड़ा हुआ है.

बाबू हरि नारायण सिन्हा के नाम पर स्थापित विद्यालय का मूल नाम बदलना क्षेत्र के इतिहास, सांस्कृतिक विरासत और जन भावनाओं के अनुरूप नहीं माना जा रहा है. लोगों का कहना है कि क्षेत्र की जन भावनाओं एवं ऐतिहासिक विरासत का सम्मान करते हुए मूल नाम को यथावत ऊपर रखते हुए नीचे सरस्वती विद्या निकेतन जोड़ा जाए अथवा सरकार सरस्वती विद्या निकेतन (आदर्श विद्यालय) के नाम से नया विद्यालय खोले.

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By Prabhat khabar news desk

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