भोजपुर के कोईलवर प्रखंड के सुदूर गंगा-सोन के समागम स्थल पर बसे बिंदगावा स्थित संगमेश्वरनाथ परमधाम में शनिवार को अनंत विभूषण संत श्री पशुपतिनाथ बाबा की पुण्यतिथि श्रद्धा और भक्तिभाव के साथ मनायी गयी.
इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु परमधाम पहुंचे और संत बाबा की समाधि व प्रतिमा पर पूजा-अर्चना कर श्रद्धा-सुमन अर्पित किए. कार्यक्रम के बाद भंडारे का आयोजन किया गया, जिसमें श्रद्धालुओं ने प्रसाद ग्रहण किया.
संत पशुपतिनाथ बाबा का जीवन और समाधि स्थल
स्थानीय श्रद्धालुओं के अनुसार, संत श्री पशुपतिनाथ बाबा वर्ष 2004 में देह त्याग कर विष्णुलोक को प्रस्थान कर गए थे. उनकी इच्छा के अनुसार परमधाम परिसर में उनकी समाधि बनायी गयी है. उनके जीवनकाल में उपयोग की गई कई वस्तुओं को भी परिसर में सुरक्षित रखा गया है. परिसर में संत बाबा की प्रतिमा भी स्थापित है, जहां श्रद्धालु दर्शन व पूजा-अर्चना करते हैं.
अनुयायियों की मान्यता है कि संत श्री पशुपतिनाथ बाबा को भगवान शंकर के दूसरे स्वरूप के रूप में माना जाता था. उनके जीवन, साधना और त्याग से जुड़ी अनेक स्मृतियां आज भी श्रद्धालुओं के लिए आस्था का केंद्र बनी हुई हैं.
संत योगानंद जी महाराज और अनुयायियों के संस्मरण
संत योगानंद जी महाराज सहित उनके अनुयायियों ने बताया कि बाबा के जीवन से जुड़े कई संस्मरण आज भी श्रद्धालुओं को प्रेरणा देते हैं. उनकी साधना, विचार और मानव कल्याण के प्रति समर्पण अनुयायियों के लिए मार्गदर्शक हैं.
भक्तिमय वातावरण और संकल्प
पुण्यतिथि के अवसर पर पूरे परमधाम परिसर में भक्तिमय वातावरण बना रहा. श्रद्धालुओं ने संत श्री पशुपतिनाथ बाबा के चरणों में श्रद्धा-सुमन अर्पित कर उनके बताए मार्ग पर चलने का संकल्प लिया.
