Sahar CHC Doctor Shortage : भोजपुर जिले के सहार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) में डॉक्टरों की कमी के कारण मरीजों को समुचित इलाज नहीं मिल पा रहा है. जिला मुख्यालय से करीब 40 किलोमीटर दूर स्थित इस अस्पताल के कई चिकित्सकों की दूसरे अस्पतालों और कार्यालयों में प्रतिनियुक्ति कर दी गई है, जिससे स्थानीय स्वास्थ्य व्यवस्था प्रभावित हो गई है.
छह डॉक्टरों की प्रतिनियुक्ति से बढ़ी परेशानी
जानकारी के अनुसार, सहार सीएचसी के छह चिकित्सकों को अलग-अलग स्थानों पर प्रतिनियुक्त किया गया है. इनमें डॉ. जयकिंकर मिश्रा को शाहपुर, डॉ. अनामिका कुमारी, डॉ. विजय कुमार दास, डॉ. क्लीम अहमद और डॉ. मधुकामना सिंह को सदर अस्पताल तथा डॉ. अनिल कुमार पांडे को जिला प्रतिरक्षण कार्यालय भेजा गया है. वहीं एक चिकित्सक डॉ. श्वेता राजेश पिछले तीन महीने से बिना सूचना के ड्यूटी पर नहीं हैं.
महिला डॉक्टर नहीं होने से गर्भवती महिलाओं की बढ़ी मुश्किलें
स्थानीय जनप्रतिनिधियों की मांग पर सहार में महिला चिकित्सक की पदस्थापना की गई थी, लेकिन बाद में उन्हें भी आरा प्रतिनियुक्त कर दिया गया. इसके कारण गर्भवती महिलाओं को विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा नहीं मिल रही है. अस्पताल में प्रसव कार्य मुख्य रूप से एएनएम और ममता कर्मियों के भरोसे संचालित हो रहा है.
Bhojpur News : सृजित पदों के मुकाबले कम हैं डॉक्टर
सहार सीएचसी में चार एमबीबीएस डॉक्टर, एक सर्जन, एक स्त्री रोग विशेषज्ञ, छह आयुष चिकित्सक, एक दंत चिकित्सक और एक नेत्र रोग विशेषज्ञ के पद सृजित हैं. इसके अलावा अमरूहां स्वास्थ्य केंद्र में दो एमबीबीएस और एक आयुष चिकित्सक का पद स्वीकृत है. फिलहाल सहार में केवल दो एमबीबीएस डॉक्टर, तीन आयुष चिकित्सक तथा दंत और नेत्र रोग विशेषज्ञ कार्यरत हैं. वहीं अमरूहां केंद्र का संचालन भी केवल एक आयुष चिकित्सक के भरोसे हो रहा है.
प्रतिनियुक्ति समाप्त करने के निर्देश पर नहीं हुआ अमल
बताया गया कि स्वास्थ्य विभाग के सचिव ने 30 जून को सभी सिविल सर्जनों को पत्र जारी कर जिला स्तर की प्रतिनियुक्ति समाप्त कर चिकित्सकों को उनके मूल पदस्थापन स्थल पर वापस भेजने का निर्देश दिया है. इसके बावजूद अब तक इस आदेश का पालन नहीं किया गया है.
Arrah News : स्थानीय लोगों ने उठाई डॉक्टरों की वापसी की मांग
क्षेत्र के लोगों का कहना है कि यदि प्रतिनियुक्त चिकित्सकों को वापस सहार भेज दिया जाए तो अस्पताल में डॉक्टरों की कमी काफी हद तक दूर हो सकती है और मरीजों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं मिल सकेंगी.
