आरा : दो लाख क्यूसेक पर आती थी बाढ़, अब 5 लाख में भी नहीं बढ़ रहा पानी, सोन नदी के खतरे के निशान की समीक्षा जरूरी

Flood in the Son River : सोन नदी में बालू खनन से बढ़ी गहराई के कारण खतरे के निशान की समीक्षा जरूरी है। जानिए क्यों 5 लाख क्यूसेक पानी छोड़ने पर भी नहीं आ रही है अब बाढ़।

Flood in the Son River : आरा के सोन नदी में बाढ़ के पानी का जलस्तर मापने के लिए केंरीद्रीय जल आयोग की ओर से मापक यंत्र लगाया गया है. इसका उद्देश्य नदी के जलस्तर पर नजर रखना और खतरे की स्थिति में लोगों को समय रहते आगाह कर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाना है. हालांकि, बीते वर्षों में सोन नदी की प्राकृतिक स्थिति में बदलाव को देखते हुए अब इसके खतरे के निशान की समीक्षा की आवश्यकता महसूस की जा रही है.

80 के दशक में कम पानी में भी बन जाती थी बाढ़ की स्थिति

जानकारों के अनुसार, 1980 के दशक में सोन नदी की प्राकृतिक स्थिति वर्तमान से काफी अलग थी. उस समय नदी में अपेक्षाकृत कम पानी होने पर भी बाढ़ की स्थिति बन जाती थी. नदी का पानी ऊपरी हिस्सों में फैलकर आसपास के गांवों तक पहुंच जाता था. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में काफी परेशानी होती थी और कई बार जान-माल का नुकसान भी होता था.

दो लाख क्यूसेक पानी पर कोईलवर में खतरे के निशान से ऊपर पहुंचता था जलस्तर

बताया जाता है कि 80 के दशक में डेहरी ऑन सोन बराज से करीब दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने पर भोजपुर के कोईलवर में सोन नदी का जलस्तर खतरे के निशान से काफी ऊपर पहुंच जाता था. पानी नदी के तट को पार कर आसपास के गांवों में प्रवेश कर जाता था. इससे ग्रामीणों को बाढ़ और जलजमाव की गंभीर स्थिति का सामना करना पड़ता था.

बालू खनन से बढ़ी सोन नदी की गहराई

स्थानीय स्तर पर सोन नदी की बदलती स्थिति के पीछे बड़े पैमाने पर बालू खनन को भी एक प्रमुख कारण बताया जा रहा है. आरोप है कि वर्षों से मानक के विरुद्ध बालू खनन के कारण नदी की गहराई में काफी वृद्धि हुई है.

स्थानीय लोगों के अनुसार, 1980 के दशक की तुलना में वर्तमान में सोन नदी की गहराई करीब 15 से 20 मीटर तक अधिक हो गयी है. उनका कहना है कि यदि इसी तरह लगातार बालू खनन होता रहा, तो नदी की प्राकृतिक संरचना में और बदलाव हो सकता है. इसका असर आसपास के पर्यावरण, खेती और स्थानीय जनजीवन पर भी पड़ने की आशंका है.

5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी पर भी नहीं बढ़ रहा नदी का पानी

वर्तमान में सोन नदी की स्थिति पहले की तुलना में काफी अलग बतायी जा रही है. डेहरी ऑन सोन बराज से 5 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने के बावजूद नदी का पानी कई स्थानों पर तटबंध के ऊपर नहीं जा रहा है. नदी की बढ़ी हुई गहराई को इसका एक कारण बताया जा रहा है.

बाढ़ प्रमंडल, आरा के कार्यपालक अभियंता अभिषेक कुमार ने बताया कि सोन नदी की मौजूदा स्थिति को देखते हुए करीब 8 लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़े जाने पर ही नदी का पानी तटबंध के ऊपर जाने की स्थिति बन सकती है. ऐसे में वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए खतरे के निशान की समीक्षा किया जाना आवश्यक है.

बदलती प्राकृतिक स्थिति के अनुरूप जरूरी है समीक्षा

सोन नदी के जलस्तर को लेकर पुराने आंकड़ों और वर्तमान स्थिति में अंतर दिखाई दे रहा है. ऐसे में बाढ़ की निगरानी के लिए निर्धारित खतरे के निशान का नए सिरे से आकलन किए जाने की जरूरत बतायी जा रही है.

नदी की गहराई, जल प्रवाह, तटबंधों की स्थिति और आसपास के भौगोलिक बदलावों को ध्यान में रखते हुए खतरे के निशान की समीक्षा होने से बाढ़ प्रबंधन की तैयारियों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है. साथ ही, भविष्य में जलस्तर बढ़ने की स्थिति में प्रभावित क्षेत्रों की पहचान और लोगों को समय पर सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाने में भी मदद मिल सकती है.

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By नरेद्र प्रसाद सिंह

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