औद्याेगिक श्रेत्र घोषित होने पर किसानों में आक्रोश, किया प्रदर्शन

किसानों ने कहा, हमलोगों के साथ बैठक कर सामाजिक सहमति के बाद की जानी चाहिए थी औद्योगिक क्षेत्र की घोषणा

तरारी.

प्रखंड क्षेत्र अंतर्गत सिकरहटा थाना क्षेत्र के रन्नी, पटखौली, निर्भयडिहरा गांव के किसानों ने औद्योगिक क्षेत्र की घोषणा के बाद बवाल किया. सैकड़ों की संख्या में किसानों ने शिव मंदिर से सटे ग्रामीण सड़क को अवरुद्ध कर जमीन वापस दो के साथ सरकार विरोधी जमकर नारे लगाये. किसान युगेंद्र मिश्रा के नेतृत्व में सैकड़ों किसान सरकार के औद्योगिक क्षेत्र बनाने के निर्णय का विरोध कर रहे थे.

किसानों का कहना था कि कुरमुरी मौजा में बननेवाली औद्योगिक क्षेत्र को यहां स्थानांतरित कर गांव के लोगों को विस्थापित होने पर मजबूर किया जा रहा है. किसानों ने बताया कि चिह्नित क्षेत्र का न तो ढाल का विश्लेषण किया गया और न ही मिट्टी की जांच की गयी है. स्थल चयन में बियाडा के मानदंड का भी पालन नहीं किया गया है. किसानों का कहना है कि नहर से सिंचाई के लिए बने आउटलेट अवरूद्ध होंगे, उससे सिंचाई होने वाली नीचे की भूमि को भी इस समस्या से दो-चार होना पड़ेगा. किसानों के बिना सहमति लिए उनके भूमि को गलत रिपोर्टिंग कर स्थानीय अधिकारियों के संवेदनहीनता से किसानों को विस्थापित होना पड़ सकता है. प्रदर्शन में योगेन्द्र मिश्रा, समाजसेवी धर्मेंद्र कुमार उर्फ कुमार बादल, डाॅ बेद प्रकाश, गौतम सिन्हा, शंकर सिंह एवं बड़े पैमाने पर भूमिहीन होनेवाले सैकड़ों महिला-पुरुष शामिल थे. वहीं, जनसुराज पार्टी के प्रांतीय नेता व अधिवक्ता घनश्याम राय ने राज्य सरकार को घेरे में लेते हुए कहा कि औद्योगिक क्षेत्र घोषित करने से पूर्व राज्य सरकार को प्रभावित होने किसानों के साथ बैठक कर सामाजिक सहमति बनानी चाहिए थी.

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Author: DEVENDRA DUBEY

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