Arrah News : आरा में सहायक प्रोफेसर बहाली की नई नियमावली में कथित विसंगतियों के विरोध में सोमवार को भोजपुर समाहरणालय के समीप जेपी स्मारक के सामने सहायक प्रोफेसर अभ्यर्थियों एवं शोधार्थियों ने विशाल महाधरना दिया. बिहार के विभिन्न जिलों से पहुंचे अभ्यर्थियों ने सरकार से नियमावली में संशोधन कर पारदर्शी एवं गुणवत्तापूर्ण बहाली प्रक्रिया लागू करने की पुरजोर मांग की.
महाधरने की अध्यक्षता आंदोलन के संयोजक कुमुद पटेल ने की. उन्होंने कहा कि वर्तमान नियमावली उच्च शिक्षा की गुणवत्ता और वर्षों से शोध कर रहे अभ्यर्थियों के हितों के अनुरूप नहीं है. सरकार से शोधार्थियों की शैक्षणिक उपलब्धियों का सम्मान करते हुए नियमावली की विसंगतियों को तत्काल दूर करने की मांग की गई है.
अभ्यर्थियों ने रखी अपनी प्रमुख मांगें
धरना के दौरान अभ्यर्थियों ने सहायक प्रोफेसर बहाली की अधिकतम आयु सीमा बढ़ाकर 55 वर्ष करने, पीएचडी धारकों को अधिक वेटेज देने, सभी विषयों में नियमित एवं शीघ्र बहाली सुनिश्चित करने, चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने तथा नई नियमावली की सभी त्रुटियों को समाप्त करने की मांग प्रमुखता से उठाई.
महाधरने के बाद अभ्यर्थियों के एक प्रतिनिधिमंडल ने जिलाधिकारी भोजपुर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम एक विस्तृत ज्ञापन सौंपा. ज्ञापन में अपनी मांगों पर शीघ्र सकारात्मक निर्णय लेने का आग्रह करते हुए चेतावनी दी गई है कि यदि मांगें समय पर पूरी नहीं हुईं, तो इस आंदोलन को पूरे बिहार में व्यापक रूप दिया जाएगा.
राज्यभर से जुटे बड़ी संख्या में शोधार्थी
इस महाधरने में राज्य के विभिन्न जिलों से आए बड़ी संख्या में अभ्यर्थियों एवं शोधार्थियों ने भाग लिया, जिसमें महिला अभ्यर्थियों की भी उल्लेखनीय उपस्थिति रही. कार्यक्रम का सफल संचालन सुशील सिंह टाइगर ने किया, जबकि धन्यवाद ज्ञापन राजा पासवान द्वारा दिया गया. इस अवसर पर कुमुद पटेल, सुशील सिंह टाइगर, राजा पासवान, चंदन तिवारी, भीम यादव, शशी शेखर, रजनीश, भानुप्रताप, रत्नेश, श्वेता, मंजू, अंकिता, सुनीता सहित राज्यभर से आए अनेक शोधार्थी एवं सहायक प्रोफेसर अभ्यर्थी मुख्य रूप से मौजूद थे.
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