नौ साल पहले भी एके-47 और हथियारों के साथ पकड़ा गया था बूटन चौधरी

बूटन को सात वर्षों की हुई थी सजा, बूटन पर दो लाख रुपये का घोषित है इनाम

आरा

. उदवंतनगर थाना क्षेत्र के बेलाउर गांव से कुख्यात अपराधी बूटन चौधरी के घर से मिले एके-47 के बाद इलाके में काफी खलबली का माहौल बन गया है. जानकारी के अनुसार बेलाउर गांव निवासी बूटन चौधरी एके-47 जैसे आधुनिक हथियारों का काफी शौकीन रहा है. 2016 में उसे एके-47 साथ पकड़ा गया था. उस समय भी उपेंद्र चौधरी पुलिस के हत्थे चढ़ा था.

बताया जा रहा है कि चार मार्च 2016 को पुलिस ने उदवंतनगर के बेलाउर गांव में छापेमारी कर एक एके-47 राइफल, तीन पिस्तौल, एके-47 की 29 गोलियां और राइफल की 31 गोलियों समेत बूटन चौधरी व उसके भाई उपेंद्र चौधरी सहित पांच अपराधियों को गिरफ्तार किया गया था. उस समय सभी एक शादी समारोह में शामिल होने गये थे. तब पुलिस की ओर से बताया गया था कि पंचायत चुनाव में वर्चस्व को लेकर बूटन चौधरी एके-47 और हथियारों के साथ इलाके में प्रदर्शन कर रहा था. उस मामले में कोर्ट की ओर से बूटन चौधरी को सात साल, जबकि उसके भाई उपेंद्र चौधरी सहित चार अन्य को तीन साल की सजा सुनायी गयी थी.

बताया जा रहा है कि बूटन चौधरी का आपराधिक इतिहास काफी लंबा है. फिलवक्त वह बेलाउर गांव निवासी बीडीसी सदस्य दीपक साह की हत्या और गोलीबारी समेत कई अन्य कांडों में फरार चल रहा है. उसके आपराधिक इतिहास को देखते हुए पुलिस मुख्यालय की ओर से उसके खिलाफ दो लाख रुपये का इनाम घोषित किया है.

उपेंद्र चौधरी का है लंबा आपराधिक इतिहास

भोजपुर एसपी राज ने इस घटना की पुष्टि करते हुए बताया कि गिरफ्तार उपेंद्र चौधरी का पूर्व आपराधिक इतिहास रहा है. उस पर पूर्व में आधा दर्जन गंभीर कांड दर्ज हैं. प्रतिबंधित हथियार बरामद के मामले में वांटेड बूटन चौधरी के अलावे उसके दोनों भाइयों को नामजद किया जा रहा है. इसके बारे में जानकारी एकत्रित की जारी है तथा बाहरी एजेंसियों की मदद ली जा रही है.

बूटन और रंजीत की है पुरानी अदावत

बेलाउर निवासी को कुख्यात बूटन चौधरी ने वर्चस्व की लड़ाई से अपराध की दुनिया में कदम रखा था. पुलिस सूत्रों के अनुसार बूटन चौधरी और रंजीत चौधरी में करीब डेढ दशक पूर्व काफी घनिष्ठता है. बाद में दोनों के बीच ऐसा तनाव पैदा हुआ कि दोनों एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन बन गये. यहां तक की एक-दूसरे के खून के प्यासे हो गये. नवंबर, 2013 में बूटन चौधरी पर गोलियों से हमले हुए, फिर 2 दिसंबर, 2013 में बेलाउर पंचायत की मुखिया चंपा देवी की रस्सी से गला घोंटकर हत्या किये जाने के मामले में रंजीत चौधरी समेत उसके भाई को आरोपित बनाया गया था. बूटन चौधरी ने साल 2011 के पंचायत चुनाव में अपनी नौकर की पत्नी चंपा देवी को मुखिया से चुनाव लड़ाया था और जीत भी दर्ज की थी. तीन मई, 2016 को रंजीत चौधरी के बड़े भाई हेमंत चौधरी को चुनाव प्रचार के दौरान गोलियों से भून कर हत्या कर दी गयी थी. हेमंत चौधरी अपने छोटे भाई की पत्नी जो मुखिया पद की उम्मीदवार थीं, उसी के वोट के सिलसिले में निकले थे. इसी कड़ी में 20 जुलाई, 2016 को उसके बड़े बेटे मनीष राय को गोलियों से भून डाला गया था. सात जुलाई, 2017 को उदवंतनगर थाना क्षेत्र के बेलाउर बंगला के समीप बस से खींचकर वार्ड पार्षद के पति की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. इस घटना में गड़हनी थाना क्षेत्र के पोसवां गांव निवासी सुदेश्वर रवानी का 30 वर्षीय पुत्र परमात्मा रवानी आरा से गांव जा रहा था. परमात्मा की पत्नी रजनी देवी पोसवां पंचायत की वार्ड सदस्य थी. बूटन चौधरी के परिवार से उसके करीबी रिश्ते थे. इसके बाद 21 सितंबर 2017 को बेलाउर गांव से जीजा की बाइक लेकर जमुआंव गांव जा रहे निकले स्व. जितेंद्र चौधरी के इकलौते बेटे को गोलियों से भून दिया गया. 24 मार्च, 2021 को आरा के नवादा थाना क्षेत्र के पकड़ी-सर्किट हाउस रोड पर कुख्यात बूटन चौधरी के भतीजा दीपू चौधरी की गोली मारकर हत्या कर दी गयी थी. वह आरा कोर्ट में पेशी के लिए भागलपुर केंद्रीय कारा से आये अपने चाचा बूटन चौधरी से मिलने के लिए आया हुआ था. साथ में उसका साथी अजय चौधरी उर्फ गुड्डू चौधरी भी था. दोनों मिलकर बाइक से घर लौट रहे थे. तभी पर की पकड़ी-सर्किट हाउस रोड में दौड़ाकर गोली मार दी गई. इन घटना में किसी का सुहाग उजड़ गया, तो किसी की गोद सुनी हो गयी.

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Author: DEVENDRA DUBEY

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