PM Surya Ghar Yojana : आरा जिले में प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को लेकर उम्मीद के मुताबिक उत्साह देखने को नहीं मिल रहा है. हालात यह हैं कि योजना के प्रचार-प्रसार और लाभुकों को जोड़ने के लिए आयोजित लोन मेले में बेहद कम लोग पहुंचे. भोजपुर जिले के विभिन्न नगर निकायों में मंगलवार को आयोजित इस विशेष शिविर में महज 38 लोगों की उपस्थिति दर्ज की गई, जिससे योजना की जमीनी हकीकत साफ झलक रही है.
इस योजना के तहत अधिक से अधिक लोगों को जोड़ने, नए आवेदन लेने और बैंकों में लंबित मामलों के जल्द निपटारे के उद्देश्य से विद्युत आपूर्ति प्रमंडल आरा और जगदीशपुर की ओर से यह लोन मेला लगाया गया था. आरा नगर निगम के साथ-साथ पीरो, कोईलवर, गड़हनी, जगदीशपुर, बिहिया और शाहपुर जैसे नगर क्षेत्रों में भी शिविर आयोजित किए गए थे.
मेले में नहीं दिखी उम्मीद जैसी भीड़
जहां प्रशासन को बड़ी संख्या में लोगों के आने की उम्मीद थी, वहां स्थिति बिल्कुल उलट दिखी. सभी नगर निकायों को मिलाकर सिर्फ 38 लोग ही लोन मेले में पहुंचे. इनमें से ज्यादातर लोगों ने आवेदन भी नहीं किया, बल्कि सिर्फ योजना की जानकारी लेकर लौट गए.
इस कम उपस्थिति ने यह सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर इतनी महत्वाकांक्षी योजना के प्रति लोगों में रुचि क्यों नहीं बन पा रही है. स्थानीय स्तर पर योजना का प्रभाव लगभग नगण्य दिखाई दे रहा है.
बैंकों की भूमिका पर उठ रहे सवाल
जानकारी के अनुसार, पहले भी कई लोगों ने इस योजना के तहत आवेदन किया था, लेकिन उन्हें बैंकों से लोन नहीं मिल सका. यही कारण है कि अब नए लोग आवेदन करने से हिचक रहे हैं.
लोगों का कहना है कि अगर बैंक समय पर लोन उपलब्ध कराएं, तो योजना का लाभ ज्यादा लोगों तक पहुंच सकता है. लेकिन वर्तमान स्थिति में बैंकिंग प्रक्रिया की धीमी रफ्तार योजना की राह में सबसे बड़ी बाधा बन रही है.
प्रशासन की उदासीनता भी बनी वजह
स्थानीय लोगों और जानकारों का मानना है कि सिर्फ बैंकों को जिम्मेदार ठहराना पर्याप्त नहीं है. जिला प्रशासन की ओर से भी योजना के प्रति सक्रियता की कमी देखी जा रही है. अगर समय-समय पर निगरानी और फॉलोअप किया जाए, तो स्थिति में सुधार आ सकता है.
योजना की सफलता पर खड़े हुए सवाल
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना का उद्देश्य लोगों को सस्ती और स्वच्छ ऊर्जा उपलब्ध कराना है. लेकिन भोजपुर जिले में जिस तरह से इसकी अनदेखी हो रही है, उससे इसकी सफलता पर सवाल उठने लगे हैं.
अब जरूरत है कि प्रशासन और बैंक मिलकर इस योजना को जमीन पर उतारने के लिए गंभीर पहल करें, ताकि आम लोगों को इसका वास्तविक लाभ मिल सके. फिलहाल, आरा में आयोजित यह लोन मेला उम्मीदों के विपरीत फीका ही साबित हुआ.
