मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के अंतर्गत पंचायती राज विभाग द्वारा क्रियान्वित योजनाओं में निजी भूमि पर संचालित नल-जल योजना के लिए भूमि उपलब्ध कराने वाले अनुरक्षकों के वास्ते राहत भरी खबर सामने आई है.
लंबे समय से लंबित मानदेय भुगतान की समस्या के समाधान के लिए राज्य सरकार ने एक नई और सरल व्यवस्था लागू कर दी है. इसके तहत अब निजी जमीन उपलब्ध कराने वाले अनुरक्षकों को उनका लंबित और प्रतिमाह मिलने वाला मानदेय सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी (डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर) के माध्यम से भेजा जाएगा.
इस संबंध में भोजपुर जिला पंचायत पदाधिकारी ने सभी प्रखंड विकास पदाधिकारियों (BDO), प्रखंड पंचायत राज पदाधिकारियों तथा पंचायत सचिवों को आधिकारिक पत्र जारी कर राज्य सरकार के इन निर्देशों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र अनुपालन सुनिश्चित करने का सख्त निर्देश दिया है.
क्यों आ रही थी मानदेय भुगतान में समस्या ?
विभाग द्वारा जारी पत्र में यह बताया गया है कि मुख्यमंत्री ग्रामीण पेयजल निश्चय योजना के तहत कई महत्वपूर्ण जलापूर्ति योजनाएं निजी भूमि पर संचालित हो रही हैं.
भूमि का राज्यपाल के नाम निबंधन (रजिस्ट्री) नहीं कराए जाने के कारण संबंधित भू-स्वामियों का मानदेय काफी लंबे समय से लंबित पड़ा हुआ था, जिससे इन योजनाओं के सुचारू संचालन और रखरखाव पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा था.
इस गंभीर समस्या को गंभीरता से लेते हुए विकास आयुक्त, बिहार की अध्यक्षता में आयोजित एक उच्चस्तरीय बैठक में इस नई व्यवस्था को लागू करने का अंतिम निर्णय लिया गया.
एग्रीमेंट और भुगतान की प्रक्रिया
नई व्यवस्था के प्रावधानों के अनुसार, अब संबंधित भू-स्वामी या अनुरक्षकों का मानदेय क्रियान्वयन एवं प्रबंधन समिति के माध्यम से नहीं भेजा जाएगा, बल्कि पंचायत सचिव द्वारा सीधे उनके बैंक खाते में डीबीटी के जरिए प्रति माह दो हजार रुपये की दर से भुगतान किया जाएगा.
निर्देशों में यह भी स्पष्ट किया गया है कि जो भू-स्वामी अपनी निजी भूमि राज्यपाल के नाम निबंधित नहीं कराना चाहते हैं, उन्हें पंचायत सचिव के साथ एक हजार रुपये के स्टांप पेपर पर एकरारनामा (एग्रीमेंट) करना होगा.
इस एकरारनामे में इस बात का स्पष्ट उल्लेख करना अनिवार्य होगा कि वे अपनी भूमि पर संचालित पेयजल योजना के संचालन में किसी भी प्रकार की बाधा उत्पन्न नहीं करेंगे तथा एक अनुरक्षक के रूप में अपने सभी दायित्वों का पूरी निष्ठा से निर्वहन करते रहेंगे.
यह एकरारनामा प्रथम श्रेणी दंडाधिकारी (फर्स्ट क्लास मजिस्ट्रेट) के समक्ष दोनों पक्षों के हस्ताक्षर से कानूनी रूप से संपन्न कराया जाएगा.
एकरारनामा की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पंचायत सचिव द्वारा सभी लंबित और नियमित मानदेय की राशि डीबीटी के माध्यम से सीधे संबंधित भू-स्वामी के बैंक खाते में ट्रांसफर कर दी जाएगी.
स्टांप शुल्क का वहन करेगी ग्राम पंचायत
इस पूरी प्रक्रिया के दौरान स्टांप शुल्क और नोटरी पर होने वाले कुल खर्च का वहन संबंधित ग्राम पंचायत द्वारा अपने कंटिंजेंसी फंड से किया जाएगा.
जिला पंचायत पदाधिकारी ने सभी संबंधित प्रखंडों को यह स्पष्ट निर्देश दिया है कि वे राज्य सरकार के इन आदेशों का त्वरित और शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करें, ताकि सभी लंबित मामलों का शीघ्र निष्पादन हो सके और ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल योजनाओं का संचालन पूरी तरह निर्बाध रूप से जारी रह सके.
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