बिहार पंचायत : 15 वीं वित्त का दस प्रतिशत से अधिक राशि बची तो नहीं मिलेगा 16 वीं वित्त का लाभ, आरा पंचायतों के लिए अलर्ट जारी

बिहार की पंचायतों के लिए सरकार का कड़ा रुख सामने आया है. यदि 15वीं वित्त आयोग की राशि का 10% से अधिक हिस्सा खर्च नहीं हुआ, तो 16वीं वित्त आयोग का फंड रोक दिया जाएगा. यह नई व्यवस्था 1 अप्रैल 2026 से लागू है.

Arrah Panchayat fund Alert : आरा के उदवंंतनगर पंचायत प्रतिनिधियों के लिए एक अहम चेतावनी सामने आई है, जिसने कई जनप्रतिनिधियों की चिंता बढ़ा दी है. सरकार की ओर से स्पष्ट निर्देश जारी किया गया है कि जिन पंचायतों ने अब तक 15वीं वित्त आयोग की राशि का सही उपयोग नहीं किया है, उन्हें आने वाले समय में 16वीं वित्त आयोग का लाभ नहीं मिलेगा. इस आदेश के बाद पंचायत स्तर पर हड़कंप मचा हुआ है और अब तेजी से राशि खर्च करने की कवायद शुरू होने की संभावना है.

दरअसल, जिला परिषद द्वारा जारी गाइडलाइन में साफ कहा गया है कि अगर किसी पंचायत के पास 15वीं वित्त की आवंटित राशि का 10 प्रतिशत से अधिक हिस्सा बचा रहता है, तो उसे 16वीं वित्त आयोग के तहत मिलने वाली अनुदान राशि से वंचित कर दिया जाएगा. यह निर्देश त्रिस्तरीय पंचायत राज संस्थाओं पर लागू होगा.

Arrah News : 1 अप्रैल 2026 से लागू हो चुकी नई व्यवस्था

सरकारी जानकारी के अनुसार 1 अप्रैल 2026 से 15वीं वित्त योजना को समाप्त कर 16वीं वित्त योजना की शुरुआत हो चुकी है. ऐसे में सरकार अब यह सुनिश्चित करना चाहती है कि पहले मिली राशि का सही तरीके से उपयोग हुआ या नहीं. इसी वजह से पंचायतों से पूरा लेखा-जोखा मांगा जा रहा है.

निर्देशों में यह भी कहा गया है कि 16वीं वित्त आयोग की पहली किस्त जारी करने से पहले यह सुनिश्चित करना जरूरी होगा कि पंचायतों के पास 14वें या उससे पहले के वित्त आयोग की कोई राशि बकाया न हो. साथ ही 15वीं वित्त की टाइड और अनटाइड फंड का 10 प्रतिशत से ज्यादा हिस्सा वित्तीय वर्ष 2028-29 तक शेष नहीं रहना चाहिए.

राशि बची तो अगली किस्त पर लगेगी रोक

गाइडलाइन में साफ तौर पर उल्लेख किया गया है कि यदि किसी पंचायत के पास निर्धारित सीमा से अधिक राशि बची रहती है, तो आने वाले वित्तीय वर्षों में 16वीं वित्त आयोग की राशि जारी नहीं की जाएगी. यही कारण है कि अब पंचायत प्रतिनिधि तेजी से योजनाओं को धरातल पर उतारने की तैयारी में जुट सकते हैं.

सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि पंचायतें इस राशि का उपयोग सिर्फ विकास योजनाओं में ही नहीं, बल्कि सोलर स्ट्रीट लाइट, अनुरक्षक भुगतान और बिजली बिल भुगतान जैसे कार्यों में भी कर सकती हैं.

खर्च के मामले में कुछ पंचायतें आगे, कुछ बेहद पीछे

वर्ष 2025-26 में 15वीं वित्त की राशि खर्च करने के मामले में उदवंंतनगर प्रखंड की कुछ पंचायतों ने बेहतर प्रदर्शन किया है, जबकि कुछ पंचायतें अभी भी काफी पीछे हैं.

छोटी सासाराम पंचायत को 3750444.11 की राशि मिली थी, जिसमें से 2271262 खर्च किए गए. कारीसाथ पंचायत ने 3168015.09 में से 1573288 खर्च किए. वहीं नवादावेन पंचायत को 7004045.75 की राशि मिली, लेकिन खर्च सिर्फ 1135933 ही हुआ.

सबसे चौंकाने वाली स्थिति मसाढ़ पंचायत की रही, जहां 2605182.67 की राशि मिलने के बावजूद एक भी रुपया खर्च नहीं किया गया. इसी तरह कसाप पंचायत में भी शून्य खर्च दर्ज किया गया है.

दूसरी ओर सोनपुरा पंचायत ने 9514520.67 में से 4025234 खर्च किए, जबकि बेलाउर पंचायत ने 5523654.15 में से 1768205 खर्च किए. उदवंंतनगर पंचायत ने 2378865.31 में से 940036 खर्च कर मध्यम स्थिति दिखाई.

बढ़ सकती है जवाबदेही और निगरानी

इस नए निर्देश के बाद अब पंचायतों की जवाबदेही और बढ़ने वाली है. जिला प्रशासन भी इस पूरे मामले पर नजर बनाए हुए है और उम्मीद की जा रही है कि आने वाले दिनों में खर्च की समीक्षा और सख्ती से की जाएगी.


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By Vijay kumar ojha

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