Arrah News : नोटरी अधिवक्ता द्वारा दिलाया गया शपथ पत्र अब हर सरकारी कार्यालय में पूरी तरह मान्य होगा. इससे संबंधित आवश्यक आदेश सदर अनुमंडल अधिकारी शिप्रा विजय कुमार चौधरी ने 10 जुलाई को ही आधिकारिक रूप से जारी कर दिया है.
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा है कि कार्यहित एवं प्रशासनिक दृष्टिकोण से यह पाया गया कि विभिन्न प्रशासनिक कार्यों में प्रयुक्त होने वाले शपथ पत्र व घोषणा पत्र के सत्यापन हेतु आवेदकों द्वारा कार्यपालक दंडाधिकारी के समक्ष अनावश्यक रूप से मामलों को प्रस्तुत किया जा रहा है. जबकि उक्त विधिक कार्य हेतु विधिवत नियुक्त नोटरी अधिवक्ता पूरी तरह सक्षम प्राधिकारी हैं.
अनुमंडलाधिकारी ने कहा कि कार्यपालक दंडाधिकारी के पास अनावश्यक रूप से जाने से कार्यालयीन कार्य प्रभावित हो रहे हैं एवं आम नागरिकों को भी काफी असुविधा हो रही है.
कार्यपालक दंडाधिकारी के हस्ताक्षर अनिवार्य नहीं
सदर एसडीओ ने विधिक प्रावधानों की जानकारी देते हुए बताया कि नोटरी अधिनियम 1952 की धारा 8 के अंतर्गत विधिवत नियुक्त नोटरी अधिवक्ता को शपथ पत्र दिलाने, शपथ पत्र का सत्यापन करने तथा महत्वपूर्ण दस्तावेजों का प्रमाणीकरण व नोटरीकरण करने का पूर्ण विधिक अधिकार प्राप्त है.
वहीं शपथ अधिनियम 1969 की धारा 3 के प्रावधानों के अनुसार, विधि द्वारा अधिकृत व्यक्ति के समक्ष दिलाई गई शपथ पूरी तरह विधि सम्मत एवं मान्य होती है, जिसमें विधिवत नियुक्त नोटरी अधिवक्ता भी सम्मिलित हैं.
इसके अतिरिक्त दीवानी प्रक्रिया संहिता 1908 की धारा 139 के अंतर्गत शपथ पत्र का सत्यापन सक्षम प्राधिकारी द्वारा किया जाना ही पर्याप्त है तथा प्रत्येक स्थिति में कार्यपालक दंडाधिकारी या राजपत्रित पदाधिकारी से हस्ताक्षर कराना अनिवार्य नहीं है, जब तक की किसी विशेष अधिनियम, नियम अथवा सरकारी आदेश द्वारा ऐसा विशेष रूप से अनिवार्य न किया गया हो.
सभी शाखाओं को अनुपालन का निर्देश
इसे लेकर उपयुक्त विधिक प्रावधानों के आलोक में सदर अनुमंडलाधिकारी ने सख्त आदेश दिया है कि सरकार द्वारा नियुक्त एवं अधिसूचित नोटरी अधिवक्ता द्वारा सत्यापित, प्रमाणित व नोटरीकृत शपथ पत्र, घोषणा पत्र एवं अन्य दस्तावेज उन सभी प्रशासनिक कार्यों एवं प्रक्रियाओं में पूरी तरह मान्य एवं स्वीकार होंगे, जहां किसी विशेष अधिनियम, नियम या सरकारी आदेश द्वारा कार्यपालक दंडाधिकारी व अन्य राजपत्रित पदाधिकारी के हस्ताक्षर अनिवार्य रूप से निर्धारित न किए गए हों.
इसके साथ ही आदेश में स्पष्ट किया गया है कि केवल इस तकनीकी आधार पर कि उक्त दस्तावेजों पर कार्यपालक दंडाधिकारी या अन्य राजपत्रित पदाधिकारी के हस्ताक्षर नहीं है, विधिवत नोटरीकृत दस्तावेजों को कोई भी कार्यालय अस्वीकार नहीं करेगा. उन्होंने 10 जुलाई को ही कड़ा आदेश दिया है कि अनुमंडल के सभी संबंधित कार्यालय, शाखा एवं कर्मचारी इस आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करेंगे.
Also Read : या जी : बिजली चोरी करते पकड़े गए दो उपभोक्ता, हजारों रुपये का जुर्माना और FIR दर्ज
