आरा के मॉडल सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड सेवा ठप, मरीज भटकने को मजबूर; टेक्नीशियन और कर्मियों पर मनमानी करने का आरोप

आरा के मॉडल सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जैसी बुनियादी जांच की सुविधा दम तोड़ रही है. सीमित दिनों और घंटों के कारण मरीजों को बाहर डेढ़ गुना अधिक पैसे खर्च करने पड़ रहे हैं. यह अव्यवस्था सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर गंभीर सवाल उठाती है.

Arrah Sadar Hospital : आरा स्थित मॉडल सदर अस्पताल, जिसे सरकार ने बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं के लिए विकसित किया था, आज खुद अव्यवस्था का शिकार नजर आ रहा है. करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद यहां मरीजों को बुनियादी जांच सुविधा तक के लिए भटकना पड़ रहा है.

अल्ट्रासाउंड के लिए मरीजों को बाहर का सहारा

अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की सुविधा होने के बावजूद मरीजों को इसका लाभ सही तरीके से नहीं मिल पा रहा है. सप्ताह में केवल तीन दिन-मंगलवार, गुरुवार और शनिवार-ही यह सुविधा उपलब्ध कराई जाती है. बाकी चार दिनों में मरीजों को मजबूरी में निजी क्लीनिक का रुख करना पड़ता है, जहां उन्हें डेढ़ से दो गुना तक अधिक पैसे खर्च करने पड़ते हैं.

सरकारी अस्पताल में मुफ्त या सस्ती जांच की उम्मीद लेकर आने वाले मरीजों को इस व्यवस्था के कारण आर्थिक बोझ झेलना पड़ रहा है. इससे लोगों में काफी नाराजगी है और वे खुद को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं.

Arrah News : समय की पाबंदी से और बढ़ी परेशानी

अल्ट्रासाउंड के लिए पंजीकरण की व्यवस्था भी मरीजों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है. अस्पताल में सिर्फ सुबह 7 बजे से 8 बजे तक, यानी महज एक घंटे के लिए ही नंबर लगाने की सुविधा दी जाती है.

ऐसे में यदि किसी मरीज को 8 बजे के बाद डॉक्टर अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह देते हैं, तो उसके पास कोई विकल्प नहीं बचता और उसे बाहर ही जांच करानी पड़ती है. यह व्यवस्था मरीजों के लिए बेहद असुविधाजनक साबित हो रही है.

मरीजों के साथ मनमानी का आरोप

अस्पताल के टेक्नीशियन और कर्मियों पर भी मनमानी करने के आरोप लग रहे हैं. कई मरीजों का कहना है कि उनका व्यवहार ठीक नहीं रहता और कभी-कभी पैसे की मांग भी की जाती है.

अस्पताल में इलाज कराने आई एक मरीज, पार्वती, ने बताया कि उन्हें अल्ट्रासाउंड के लिए लाइन में खड़ा होने तक नहीं दिया गया, जिसके बाद उन्हें मजबूरी में बाहर जाकर जांच करानी पड़ी.

प्रशासन से उठे सवाल

इतनी बड़ी सुविधा और संसाधनों के बावजूद यदि मरीजों को बुनियादी सेवाएं नहीं मिल पा रही हैं, तो यह अस्पताल प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़ा करता है.

इस संबंध में सिविल सर्जन डॉ. शिवेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि मामला उनके संज्ञान में नहीं था, लेकिन अब इसकी जांच कराई जाएगी और मरीजों को बेहतर सुविधा देने का प्रयास किया जाएगा.

सुधार की जरूरत

फिलहाल, मॉडल सदर अस्पताल में अल्ट्रासाउंड जैसी जरूरी जांच सुविधा की बदहाल स्थिति मरीजों के लिए बड़ी परेशानी बन चुकी है. जरूरत है कि प्रशासन इस मामले को गंभीरता से लेते हुए व्यवस्था में सुधार करे, ताकि मरीजों को समय पर और सस्ती चिकित्सा सुविधा मिल सके.


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By Narendra Prasad Sin

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